ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) की प्रेस रिलीज़
इस प्रेस रिलीज़ में, लोको पायलटों ने ज़ोर देकर कहा है कि इंडियन रेलवे को फटीग रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम (FRMS) पर आधारित नियमों को सख्ती से लागू करने की तुरंत ज़रूरत है। उन्होंने बताया है कि इंडिगो एयरलाइंस से जुड़ा हालिया मामला दिखाता है कि जब बड़ी, ताकतवर निजी कंपनियाँ उनका विरोध करती हैं तो सुरक्षा से जुड़े नियमों को आसानी से नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है और सरकारें उनकी इच्छाओं के आगे झुक जाती हैं। विमानन क्षेत्र का यह विवाद भारतीय रेल के लोको पायलटों द्वारा झेली जा रही पुरानी समस्याओं से बिल्कुल मेल खाता है: लगातार रात की शिफ़्टें, अत्यधिक ड्यूटी घंटे, और अपर्याप्त आराम।
प्रेस रिलीज़ में यह भी बताया गया है कि चेन्नई हाई कोर्ट ने डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर (सेंट्रल) चेन्नई को 26/04/22 से 6 हफ़्ते के अंदर जॉब एनालिसिस करने का आदेश दिया था। लेकिन रेलवे प्रशासन ने यह कहते हुए मज़दूर विभाग को अनुमति देने से इनकार कर दिया कि सिर्फ़ रेलवे के पास ही यह एनालिसिस करने की काबिलियत है। मज़दूरों ने एक बार फिर उस बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे को उजागर किया है जो करोड़ों रेल यात्रियों और लाखों रेलवे कर्मचारियों की सुरक्षा को ख़तरे में डालता है।

ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) की प्रेस रिलीज़
दिनांक: 07.12.2025
प्रेस विज्ञप्ति
प्रति,
संपादक महोदय,
विषय: एयरलाइन थकान संकट और इंडिगो विवाद – भारतीय रेल को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए सबक
1) हवाई मार्गों में अराजकता
पिछले कुछ दिनों से इंडिगो के थकान-ग्रस्त क्रू से जुड़ा संकट राष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बना हुआ है। भारत का विमानन सुरक्षा ढांचा अपनी ही थकान-जोखिम नियमावली लागू करने में संघर्ष कर रहा है।
सरकार ने 2023 में फैटीग रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम (FRMS) अपनाया और संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नवंबर 2025 से लागू करने की अधिसूचना जारी की। ये नियम अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित थे।
इंडिगो ने दो वर्षों की तैयारी के बावजूद अपने क्रू शेड्यूलिंग में कोई ठोस बदलाव नहीं किया। डीजीसीए (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) भी स्टाफ की कमी से जूझ रहा था। समय सीमा आने पर इंडिगो ने दबाव बनाया और सरकार ने सुरक्षा-आधारित नियम को टाल दिया।
यात्रियों को बिना सूचना दिए चेक-इन कराया गया, जिससे हवाई अड्डों पर भारी भीड़ और अराजकता फैल गई। इंडिगो ने संकटग्रस्त यात्रियों से 20 गुना तक अधिक किराया वसूला।
यह सवाल उठता है कि क्या सुरक्षा-संबंधी श्रम सुधार शक्तिशाली कंपनियों के विरोध के बीच टिक पाएंगे?
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2) इंडिगो प्रकरण – भारतीय रेल के लिए आईना: लोको पायलट थकान संकट
यह विवाद भारतीय रेल के लोको पायलटों की दशकों पुरानी समस्याओं से मेल खाता है। उनकी मांगें रही हैं:
– अधिकतम दो लगातार रात्रि ड्यूटी।
– मानव शरीर विज्ञान के अनुरूप ड्यूटी घंटे।
– प्रत्येक ड्यूटी के बाद पर्याप्त विश्राम और साप्ताहिक अवकाश।
– नींद-विज्ञान और सर्केडियन रिद्म पर आधारित रोस्टर योजना।
रेलवे सुरक्षा सीधे तौर पर मानव सतर्कता पर निर्भर है। कई उच्च स्तरीय समितियों (अनिल काकोदकर सुरक्षा समीक्षा समिति 2012, त्रिपाठी समिति 2013) ने वैज्ञानिक कार्य-घंटों की सिफारिश की, लेकिन रेलवे बोर्ड ने लागू नहीं किया।
1948 से लोको रनिंग स्टाफ 6 घंटे की ड्यूटी की मांग कर रहे हैं। अगस्त 1973 की हड़ताल के बाद 10 घंटे की सीमा तय हुई, लेकिन आज भी यह सपना ही है।
सिंगपुर स्टेशन (बिलासपुर) में 19/04/2023 की ट्रेन दुर्घटना की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि लोको पायलट 14 से 23 घंटे तक ड्यूटी पर थे, जबकि 2016 में अधिकतम सीमा 12 घंटे तय की गई थी।
चेन्नई उच्च न्यायालय ने 26/04/2022 को आदेश दिया कि लोको पायलटों का जॉब एनालिसिस किया जाए, लेकिन रेलवे प्रशासन ने अनुमति नहीं दी।
साप्ताहिक विश्राम (PR) को घटाकर 48 कर दिया गया, जबकि कानूनी रूप से 52 होना चाहिए।
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3) सरकार की दुविधा: श्रमिकों पर सख्ती, कॉरपोरेट्स पर नरमी
हर श्रमिक आंदोलन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है, लेकिन जब बड़ी निजी कंपनियां सुरक्षा नियमों का विरोध करती हैं, तो सरकार झुक जाती है।
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4) अंतरराष्ट्रीय अनुभव: थकान-विज्ञान से समझौता नहीं
– यूरोपीय संघ यूरोपियन यूनियन रेलवेज़ में सख्त ड्यूटी और विश्राम सीमा है।
– अमेरिकी रेलरोड Hours of Service Act के तहत चलते हैं।
– एयरलाइंस ने ICAO आधारित FRMS अपनाया है।
– ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैव-गणितीय मॉडल से शेड्यूल बनाते हैं।
मूल सिद्धांत:
1. थकान जानलेवा है।
2. थकान-जोखिम पर समझौता नहीं हो सकता।
3. नियमों का सख्त और निरंतर पालन होना चाहिए।
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5) भारतीय रेल को क्या चाहिए: FRMS आधारित नियम
1. लोको पायलटों के लिए 6 घंटे दैनिक सीमा।
2. सर्केडियन विज्ञान आधारित रोस्टर।
3. अधिकतम दो लगातार रात्रि ड्यूटी।
4. प्रत्येक ड्यूटी के बाद 16 घंटे विश्राम और साप्ताहिक अवकाश।
5. क्रू शेड्यूलिंग में थकान-जोखिम मॉडलिंग।
6. 30% तक की रिक्तियों को भरना।
7. समय पर पद सृजन।
8. नियमों का सख्त पालन।
9. पारदर्शी निगरानी और जवाबदेही।
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6) नए श्रम संहिताओं के तहत सुरक्षा का ह्रास
12 घंटे ड्यूटी की अनुमति देने वाले नए श्रम संहिताओं से सुरक्षा कमजोर नहीं होनी चाहिए। लोको पायलट जैसे परिवहन कर्मियों को अधिक सुरक्षा चाहिए।
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7) निष्कर्ष: सुरक्षा टाली नहीं जा सकती
इंडिगो विवाद केवल विमानन का मुद्दा नहीं है, बल्कि सभी उच्च-जोखिम उद्योगों के लिए चेतावनी है।
चाहे आसमान हो या रेल, श्रमिक थकान सीधे यात्री सुरक्षा को प्रभावित करती है। आधुनिक नींद-विज्ञान आधारित नियम केवल यूनियन की मांग नहीं, बल्कि सुरक्षा मानक हैं।
एयर इंडिया की बिक्री और टिकट किराए में वृद्धि भी संकट का हिस्सा है।
रेलवे प्रबंधन को तुरंत आधुनिक FRMS ढांचा अपनाना चाहिए – अब, तुरंत।
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धन्यवाद,
के.सी. जेम्स
महासचिव,
एआईएलआरएसए
