उत्तर प्रदेश के विद्युत कर्मचारियों ने पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉम के निजीकरण का निर्णय वापस लेने की माँग दोहराई

उत्तर प्रदेश के विद्युत कर्मचारियों ने पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉम के निजीकरण का निर्णय वापस लेने की माँग दोहराई

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश की प्रेस विज्ञप्ति

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश का मानना है कि जब सरकारी वितरण कंपनियाँ लगातार बेहतर परिणाम दे रही हैं, तब उत्तर प्रदेश की करोड़ों की सार्वजनिक परिसंपत्तियों को निजी घरानों के हवाले करना जनविरोधी कदम है। अतः पूर्वांचल तथा दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश

प्रेस विज्ञप्ति 19 जनवरी, 2026

सरकारी विद्युत वितरण कंपनियों में उल्लेखनीय सुधार के बाद पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉम के निजीकरण का निर्णय वापस लिया जाए – संघर्ष समिति

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने मांग की है कि पूर्वांचल तथा दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। समिति ने कहा कि हाल के वर्षों में सरकारी वितरण कंपनियों ने न केवल अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि राजस्व वसूली और लाइन हानियों में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है, जो सार्वजनिक क्षेत्र की दक्षता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार के विद्युत मंत्रालय ने स्वयं स्वीकार किया है कि देश की सरकारी विद्युत वितरण कंपनियों ने व्यापक सुधार करते हुए एक नया अध्याय लिखा है।

वर्ष 2013–14 में जहां डिस्कॉम ₹67,952 करोड़ के घाटे में थे, वहीं वर्ष 2024–25 में उनकी स्थिति सुधरकर ₹2,701 करोड़ के मुनाफे में आ गई है। राष्ट्रीय स्तर पर एटी एंड सी (AT&C) हानियां घटकर 15.04% तक सीमित हो गई हैं, जो निर्धारित मानक है।

संघर्ष समिति ने कहा कि इन सुधारों के पीछे आरडीएसएस स्कीम के अंतर्गत बड़े तकनीकी निवेश, और बिजली कर्मियों की सतत मेहनत एवं समर्पण प्रमुख कारण रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में ही ₹67,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है और इसके परिणाम साफ दिखाई देने लगे हैं।

समिति ने आरोप लगाया कि जब सरकारी वितरण कंपनियाँ लगातार बेहतर परिणाम दे रही हैं, तब उत्तर प्रदेश की करोड़ों की सार्वजनिक परिसंपत्तियों को निजी घरानों के हवाले करना जनविरोधी कदम है। निजीकरण की स्थिति में किसानों और गरीब उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने तथा बिजली दरों में वृद्धि की पूरी आशंका है।

समिति ने कहा कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल डिस्कॉम के निजीकरण के विरोध में जारी आंदोलन आज 418वें दिन भी पूरे प्रदेश में सभी जनपदों व परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शनों के साथ जारी रहा।

शैलेन्द्र दुबे

संयोजक

9415006225

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