बरौनी रिफाइनरी के मज़दूरों का संघर्ष

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

बिहार राज्य की बेगूसराय जिले में स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) की बरौनी रिफाइनरी के मज़दूर प्लांट में सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के खिलाफ़ संघर्ष  कर रहे हैं। 2 फरवरी, 2026 की सुबह रिफाइनरी गेट पर सैकड़ों मज़दूरों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। मज़दूरों ने केन्द्र व राज्य सरकार तथा स्थानीय निकाय व रिफाइनरी के प्रबंधकों के खिलाफ़ अपना गुस्सा ज़ाहिर करते हुए, नारे लगाये।

बरौनी रिफाइनरी, इंडियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड की मालिकी का संस्थान है। इसमें एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, एटीएफ (विमान ईंधन), बिटुमेन (सड़क निर्माण में इस्तेमाल) इत्यादि का उत्पादन होता है। इस रिफाइनरी में स्थायी मज़दूरों सहित संविदा और अप्रेंटिस बतौर सैकड़ों मज़दूर काम करते हैं।

प्रदर्शनकारी मज़दूरों के हाथों में बैनर और प्लाकार्ड थे जिन पर लिखा था – ‘आठ घंटे काम का सरकारी नियम और घोषित न्यूनतम मज़दूरी लागू करो!’, ‘कार्यस्थल पर मज़दूरों के बैठने के लिए लेबर शेड, शुद्ध पेयजल और स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था करो!’ इत्यादि।

प्रदर्शनकारी मज़दूरों का आरोप है कि बहुत ही लम्बे समय से, उनसे बहुत ही कम वेतन पर, लंबे घंटे तक काम लिया जा रहा है। उन्हें वेतन दो-तीन महीने में एक बार ही दिया जाता है। कार्यस्थल पर सुरक्षा के सरकारी नियमों को ताक पर रखकर मज़दूरों का अतिशोषण किया जा रहा है। प्लांट में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एक भी प्राथमिक उपचार केन्द्र नहीं है। मज़दूरों ने प्लांट के भीतर सुरक्षा की गंभीर स्थिति पर चिंता जताई है।

मज़दूरों ने पिछले हादसों का हवाला देते हुए कहा कि दिसंबर 2025 में क्रेन का बेल्ट टूटने से एक मज़दूर की मौत हो गई थी। सितंबर 2021 में हुए वेसल विस्फोट में 15 से अधिक लोग घायल हुए थे। इन दुर्घटनाओं में घायल होने वाले या मरने वाले मज़दूरों को मिलने वाले मुआवज़ों में बहुत भेदभाव किया गया था।

हड़ताली मज़दूरों का कहना था कि वे सालों से ठेकेदारों की मनमानी के विरोध में रिफाइनरी प्रबंधन और सरकार से अपील करते आए हैं, लेकिन उनकी अपीलों पर किसी भी प्रकार की सुनवाई नहीं हो रही है।

2 फरवरी के दिन ही प्रबंधन और मजदूरों के बीच 13 सूत्री मांगों पर सहमति हुयी थी। परन्तु इस समझौते पर प्रबंधन ज़्यादा दिन नहीं टिका। 8 फरवरी को प्रबंधन ने मज़दूरों के नेता लाल बाबू राय के खिलाफ़ मामला दर्ज कर दिया व उन्हें निलंबित कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। प्लांट से 500 मीटर की दूरी के अंदर किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी गयी है।

अपने नेता की गिरफ़्तारी के खिलाफ़, 9 फरवरी को मज़दूरों ने काम का बहिष्कार किया। मज़दूरों का काम बहिष्कार तब तक जारी रहा, जब तक पुलिस ने उनके नेता को रिहा नहीं किया। परन्तु उनकी नौकरी अब तक बहाल नहीं की गयी है।

आंदोलन को और तेज़ करने के लिए, 15 फरवरी को हजारों मज़दूरों ने एक मज़दूर एकता सम्मेलन आयोजित किया। सम्मलेन में मज़दूरों ने ऐलान किया कि वे ठेकेदारों की मनमानी और प्रबंधन के दमनकारी रवैये के आगे नहीं झुकेंगे। जब तक उनके नेता की नौकरी को बहाल नहीं किया जाता और प्रबंधन के साथ किया गया 13 सूत्री समझौता पूरी तरह लागू नहीं होता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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