यह वीडियो, जो ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) ने तैयार किया है, बहुत ज़रूरी सवाल उठाता है। हाई पावर कमेटी ने सिफारिश की थी कि लगातार 2 से ज़्यादा नाइट शिफ्ट न हों—और विज्ञान भी बताता है कि लगातार रात की ड्यूटी से शरीर को नुकसान होता है। फिर भी लोको पायलटों को एक सॉफ़्टवेयर के मनमाने फैसले पर लगातार नाइट शिफ्ट दी जा रही है, ऐसा क्यों? न तो हफ़्ते में तय छुट्टी, न त्योहारों पर छुट्टी, न ही पर्याप्त आराम—क्या इंसानी शरीर डिजिटल घड़ी के हिसाब से चलेगा? क्यों रेल कर्मचारियों से ज़्यादा घंटे काम करवा कर उनकी और यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डाला जा रहा है जब इतनी सारी रिक्तियां है?
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