रेल चालकों का दिल्ली में जोशपूर्ण धरना

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

27 मार्च 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन (AILRSA) ने लंबे समय से लंबित अपनी मांगों को लेकर धरना आयोजित किया। धरने का आह्वान AILRSA की केद्रीय कार्यकारिणी ने किया था।

इस धरना में पूरे देश से रेलवे की 68 लॉबियों से लगभग 1000 से अधिक महिला और पुरुष लोको पायलटों, सहायक लोको पायलटों ने हिस्सा लिया। सभी इलाकों से आये नेताओं ने सभा को संबोधित किया। प्रदर्शन में कई प्रगतिशील गीत और कवितायें पेश की गईं जो लोको पायलटों के रोजमर्रा के काम में आने वाली समस्याओं को दर्शा रहीं थीं।

रेल चालकों की संघर्ष के समर्थन में मज़दूर एकता कमेटी, सीटू, इफ्टू सर्वहार और बिगुल मजदूर दस्ता के साथियों ने सभा को संबोधित किया।

धरना स्थल पर एक मुख्य बैनर लगाया गया था, जिस पर उनकी मुख्य मांगों का उल्लेख था कि:

  • एनपीएस को रद्द किया जाये और ओपीएस को बहाल किया जायेे;
  • भारतीय रेल का निजीकरण करना बंद किया जाये;
  • यात्रियों की सुरक्षा के लिये 4 घंटे से अधिक की ईएमयू और डीएमयू में सिंगलमैन वर्किंग बंद की जाये;
  • लोको में टूल बाक्स लगाना शुरू किया जाये;
  • सभी लोको में ए.सी. कार्यरत होना सुनिश्चित किया जाये;
  • सहायक लोको पायलटों और लोको पायलटों को रिस्क अलाउंस दिया जाये;
  • हाई पावर कमेटी के निर्देंशानुसार, लोको पायलट को लंबे घटों की ड्यूटी देना बंद किया जाये और 40 घंटे का रेस्ट देना शुरू किया जायेे;
  • लोको मे शौचालय का प्रावधान किया जायेे;
  • महिला लोको पायलटों के लिये कार्यस्थल पर बुनियादी सुविधायें और समुचित शौचालय उपलब्ध कराया जाये;
  • गाड़ियों का बिना गार्ड के असुरक्षित संचालन बंद किया जाये; आदि।

वक्ताओं ने इस बात पर चिंता प्रकट की कि भारतीय रेल में रेल चालकों के हज़ारों पद खाली पड़े हैं। उन्होंने खाली पदों पर तुरंत भर्ती किये जाने की मांग को उठाया। स्टाफ में की जा रही कटौती के विरोध में अपनी आवाज़ बुलंद की। रेलवे के निजीकरण को रोकने, सरकारी संस्थानों को निजी हाथों में सौंपे जाने के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई।

वक्ताओं ने बताया कि हाई पावर कमेटी की सिफारिशों के अनुसार एक लोको पायलट से 9 घंटे से ज्यादा काम नहीं करवाया जा सकता, लेकिन आज की स्थिति में उनसे 12 घंटे का काम लिया जा रहा है। उन्होंने इस बात को भी उठाया कि लंबे घंटे तक काम करवाने से रेल चालक पर थकान आ जाती है और इससे रेल यात्रियों की सुरक्षा को भी ख़तरा बना रहता है। उन्होंने जोर दिया कि रेलवे के लिये रेल चालक ही सुरक्षा के सबसे प्रभावी उपकरण हैं। अगर सिग्नल जैसे अन्य सुरक्षा उपकरण फेल भी हो जाते हैं तो एक चौकन्ना रेल चालक रेलगाड़ी को सुरक्षित रख सकता है। परन्तु अगर अत्याधिक ड्यूटी के घंटों की वजह से रेल चालक ही सुस्त हो जाता है तो दुर्घटना का ख़तरा बढ़ जाता है।

सभा में वक्ताओं ने अपनी मांगो को जोरशोर से उठाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे एक बड़े आंदोलन की तैयारी करेंगे।

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