मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट
शिमला
समस्तीपुर
रोहतक
रोहतक
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, फेडरेशनों और मज़दूर संगठनों के आह्वान पर, 1 अप्रैल 2026 को चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के विरोध में पूरे देश में काला दिवस मनाया गया। इस कार्यक्रम के लिये एटक, सीटू, मज़दूर एकता कमेटी, एसएमएस, एआईयूटीयूसी, यूटीयूसी, एआईसीसीटीयू, सेवा, एफपीएफ, टीयूसीसी तथा बैंक, बीमा और रेलवे की फेडरेशनों ने हिस्सा लिया। इसमें संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े संगठनों ने भी हिस्सा लिया।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, फेडरेशनों और मज़दूर संगठनों के आह्वान पर, 1 अप्रैल 2026 को चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के विरोध में पूरे देश में काला दिवस मनाया गया। इस कार्यक्रम के लिये एटक, सीटू, मज़दूर एकता कमेटी, एसएमएस, एआईयूटीयूसी, यूटीयूसी, एआईसीसीटीयू, सेवा, एफपीएफ, टीयूसीसी तथा बैंक, बीमा और रेलवे की फेडरेशनों ने हिस्सा लिया। इसमें संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े संगठनों ने भी हिस्सा लिया।

पंजाब

प्रयागराज

लखनऊ

उत्तर प्रदेश के लेखपाल

यमुनानगर

धूस में शिक्षक
इस दौरान हुये विरोध प्रदर्शनों में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों – विनिर्माण, कोयला, बीमा, बैंक, बंदरगाह, आईटी के मज़दूरों ने हिस्सा लिया। विभिन्न सेवा क्षेत्रों के मेहनकशों – अध्यापको, विश्वविद्यालयों के अध्यापकों, नर्साें, डाक्टरों सहित स्कीम मज़दूरों आंगनवाडी, आशा, भोजनमाता, आदि शामिल हुये। ये विरोध प्रदर्शन सरकार द्वारा 21 नवंबर 2025 से लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं के अधिसूचित किए जाने की घोषणा के खिलाफ थे।

कुरुक्षेत्र

करनाल

कानपूर

अम्बाला

जींद

जौनपुर
दिल्ली में अलग-अलग श्रम कार्यालयों और औद्योगिक इलाकों में विराध प्रदर्शन आयोजित किये गये और जिला श्रम आयुक्तों के जरिए राज्य और केन्द्र सरकार के नाम ज्ञापन सौंपे गये।

स्वास्थ्य कर्मी

हनुमानगढ़

गुरुग्राम

गौतमबुद्ध नगर

इटावा

चेन्नई
इस अवसर पर देश के अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों, जिलों व राजधानियों में रैलियों, जुलूसों, बाईक रैलियों का आयोजन किया गया। मज़दूरों ने अपने-अपने जिला उपायुक्त कार्यालयों, फैक्ट्री गेटों, श्रम आयुक्त कार्यालयों के सामने प्रदर्शन करके श्रम संहिता की प्रतियां जलाईं। कई जगहों पर लंच ब्रेक में सभाओं का आयोजन किया गया। कार्यस्थलों पर मज़दूरों ने काली पट्टी और काले बिल्ले लगाकर विरोध जताया।

छत्तीसगढ़

बोकारो

बिजनौर में स्वास्थ्य कर्मी

भोपाल में शिक्षक

भिवानी

बस्ती
विदित रहे कि केंद्र सरकार ने इन संहिताओं को उस वक्त बनाया था जब देश में लॉकडाउन लागू था। लोग अपने घरों में बंद थे और किसी प्रकार का विरोध नहीं कर पा रहे थे। इन श्रम संहिताओं से मजदूरों के अधिकारों पर गंभीर असर पड़ेगा। सरकार ने ट्रेड यूनियनों से सलाह-मशवरा किए बिना इन श्रम संहिताओं को बनाने और लागू करने का निर्णय लिया है। इन संहिताओं के लागू होने से यूनियन बनाने, हड़ताल करने, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसे अधिकार कमजोर हो जाएंगे। ये संहिताएं पूंजीपति वर्ग के पक्ष में बनाये गये है। इनमें मज़दूरों के हितों को ताक पर रखा दिया गया है।

भोपाल के बैंक कर्मी

बागपत के शिक्षक

आजमगढ़

बस्ती
