कामगार एकता कमेटी (KEC) संवाददाता की रिपोर्ट

IT क्षेत्र में श्रम कानूनों के क्रियान्वयन की मांग को लेकर 10 मार्च 2025 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में सैकड़ों IT और ITeS कर्मचारी एकत्रित हुए। उन्होंने मांग की कि मज़दूरों के रूप में उनके अधिकारों की रक्षा की जाए। उनकी मांगो में IT और ITeS नियोक्ताओं को बेहतर कार्य वातावरण और कार्य-जीवन संतुलन सुनिश्चित करना प्रमुख मांगों में से एक थी।
यह विरोध प्रदर्शन कर्नाटक राज्य IT/ITeS कर्मचारी यूनियन (KITU) द्वारा आयोजित किया गया था। कर्मचारियों ने अपने भयंकर शोषण, लंबे काम के घंटों, अवास्तविक कार्य लक्ष्यों और नौकरी की गंभीर असुरक्षा के खिलाफ आवाज उठाई।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने बताया कि भारत में IT क्षेत्र उन क्षेत्रों में से एक है जो पूंजीवादी मालिकों के लिए सबसे अधिक लाभ कमाता है, कई आईटी पेशेवरों को सप्ताहांत सहित बिना किसी ओवरटाइम के दिन में 12-14 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। बड़े पैमाने पर छंटनी के कारण उन्हें भयानक नौकरी की असुरक्षा का सामना करना पड़ता है, जिसे “प्रदर्शन-आधारित निष्काशन” के रूप में संदर्भित किया जाता है। नतीजतन, उनके बीच चिंता और अवसाद सहित शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों समस्याएं बढ़ रही हैं। एक अध्ययन के अनुसार, 70% IT पेशेवर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं।
महिला IT कर्मचारियों की स्थिति और भी खराब है क्योंकि उन्हें बड़े पैमाने पर लैंगिक भेदभाव और यौन उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ता है।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने मांग की कि IT कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा के लिए श्रम कानूनों के तहत शामिल किया जाए और 8 घंटे के कार्यदिवस के श्रम कानूनों का सख्ती से पालन किया जाए। अन्य कर्मचारियों की तरह, वे ओवरटाइम का भुगतान चाहते हैं और दंडात्मक कार्रवाई के डर के बिना काम के घंटों के बाद कंपनी के साथ संवाद करने से इंकार करने का अधिकार चाहते हैं।
उन्होंने 70 घंटे और 90 घंटे काम करने की वकालत करने वाले पूंजीपतियों के पुतले जलाकर अपना गुस्सा जाहिर किया। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए कि “नारायण मूर्ति और सुब्रमण्यन, हम आपकी लालच को सड़कों पर जला देंगे; हम मजदूर हैं, गुलाम नहीं!”
करीब एक साल पहले 13 मार्च 2024 को KITU ने कर्नाटक के श्रम मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें बताया गया था कि कैसे IT/ITeS कंपनियाँ बिना ओवरटाइम मुआवजे के मनमाने ढंग से काम के घंटे बढ़ाकर नियमित रूप से श्रम कानूनों का उल्लंघन करती हैं। परंतु, राज्य सरकार ने उनके काम के घंटों को विनियमित करने या मनमाने ढंग से छंटनी के खिलाफ सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।




