बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई के विरोध में बैंक और बीमा कर्मचारी एवं अधिकारी 18 दिसंबर 2025 को संयुक्त प्रदर्शन करेंगे

बैंक और बीमा कर्मचारियों और अधिकारियों के संघों का संयुक्त परिपत्र

(अंग्रेजी परिपत्र का अनुवाद)

ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन
नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज़
फेडरेशन ऑफ एलआईसी क्लास I ऑफिसर्स’ एसोसिएशन्स
ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन
जनरल इंश्योरेंस एम्प्लॉइज़ ऑल इंडिया एसोसिएशन
ऑल इंडिया एलआईसी एम्प्लॉइज़ फेडरेशन
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स’ एसोसिएशन

16 दिसंबर, 2025

संयुक्त अपील – 100% FDI का प्रतिरोध करें !

केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में बीमा क़ानून (संशोधन) विधेयक, 2025 प्रस्तुत किया। इस विधेयक को भ्रामक रूप से “सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा क़ानूनों का संशोधन) विधेयक, 2025” नाम दिया गया है। सरकार ने जनसमर्थक भाषा का उपयोग करके एक ऐसी नीति को वैध ठहराने का प्रयास किया है, जो मूलतः जनहित को कमजोर करती है।

यह विधेयक तीन क़ानूनों में संशोधन का प्रस्ताव करता है—बीमा अधिनियम, 1938; भारतीय जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956; तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999। इन संशोधनों के घोषित उद्देश्य बीमा क्षेत्र की वृद्धि को तेज करना, पॉलिसीधारकों की सुरक्षा को मजबूत करना, कारोबार करने में सुगमता बढ़ाना तथा नियामकीय पारदर्शिता और निगरानी को सुदृढ़ करना बताए गए हैं। किंतु गहन समीक्षा से यह स्पष्ट हो जाता है कि वास्तविक मंशा कहीं अधिक हानिकारक प्रतीत होती है; इसका उद्देश्य भारत की बहुमूल्य घरेलू बचत को विदेशी पूंजी के हवाले करना है।

यह विधेयक भारतीय बीमा कंपनियों में 100% तक विदेशी निवेश की अनुमति देने का प्रस्ताव करता है। FDI को 100% तक बढ़ाने से न तो भारतीय अर्थव्यवस्था को कोई लाभ होगा और न ही बीमाधारकों को। इससे केवल विदेशी पूंजी को घरेलू बचत तक अधिक पहुंच और नियंत्रण मिलेगा। यह सर्वविदित है कि घरेलू बचत अर्थव्यवस्था के विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते, भारत को संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने के लिए घरेलू बचत पर अधिक नियंत्रण बनाए रखना चाहिए।

सभी प्रमुख विदेशी कंपनियां पहले से ही घरेलू बीमाकर्ताओं के साथ साझेदारी में देश में कार्यरत हैं। वर्तमान 74% की FDI सीमा पर्याप्त से अधिक है और बीमा व्यवसाय में निजी क्षेत्र की वृद्धि एवं विस्तार में कोई बाधा नहीं है। वास्तव में, वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने 3 दिसंबर 2024 को राज्यसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या 877 के उत्तर में सूचित किया था कि 31 मार्च 2024 तक बीमा उद्योग में विदेशी इक्विटी का स्तर 31,365.57 करोड़ रुपये है, जो अनुमेय 74% सीमा के मुकाबले मात्र 32.67% है।

जब से FDI सीमा 74% तक बढ़ाई गई है, जीवन बीमा क्षेत्र में केवल चार कंपनियों—फ्यूचर जनरलि लाइफ, एजियास, एवीवा और क्रेडिट एक्सेस लाइफ इंश्योरेंस—ने इस सीमा का उपयोग किया है। IRDA की वार्षिक रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार, एको लाइफ, बंधन लाइफ, भारती एक्सा लाइफ, कोटक महिंद्रा इंश्योरेंस, मैक्स लाइफ और सहारा इंडिया लाइफ जैसी कई प्रमुख कंपनियों में कोई विदेशी इक्विटी नहीं है।

इसके अलावा, FDI को 100% तक बढ़ाने से बीमा उद्योग में गंभीर व्यवधान उत्पन्न होगा, क्योंकि यदि विदेशी साझेदार संयुक्त उपक्रमों से हटकर स्वतंत्र रूप से व्यवसाय चलाने का निर्णय लेते हैं, तो इसका घरेलू कंपनियों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। यह तथ्य है कि विदेशी पूंजी अधिक मुनाफे की तलाश में आती है। इसका अर्थ यह होगा कि उच्च संपन्न ग्राहकों और सबसे लाभकारी व्यवसाय को लक्ष्य बनाया जाएगा, जैसा कि पूर्णतः विदेशी स्वामित्व वाले बैंकों के मामले में देखा गया है। ऐसी स्थिति घरेलू बीमाकर्ताओं को सबसे लाभकारी व्यवसाय के लिए प्रतिस्पर्धा करने को मजबूर करेगी, जिससे समाज के निम्नमध्यम वर्ग और हाशिए पर पड़े वर्गों की बीमा आवश्यकताओं की पूरी तरह उपेक्षा होगी। अतः वर्तमान 74% की सीमा से 100% तक FDI बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है।

घरेलू बचत तक विदेशी पूंजी को अधिक पहुंच और नियंत्रण देना अविवेकपूर्ण होगा। विशेष रूप से तब, जब अर्थव्यवस्था चल रहे टैरिफ युद्धों और भारी पूंजी निकासी के कारण अनिश्चितता का सामना कर रही है, जैसा कि वर्तमान में हमारे देश में देखा जा रहा है।

18 दिसंबर 2025 को संयुक्त विरोध प्रदर्शन आयोजित करें:

उपरोक्त के मद्देनज़र, हम अपनी सभी इकाइयों और सदस्यों से आह्वान करते हैं कि वे 18 दिसंबर 2025 (गुरुवार) को सभी राज्य राजधानियों, जिला मुख्यालयों तथा सभी नगरों/केंद्रों में संयुक्त प्रदर्शन आयोजित करें और इस प्रतिगामी कदम के विरुद्ध अपना प्रबल विरोध दर्ज कराएं।

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