सर्व हिन्द निजीकरण विरोधी फोरम (AIFAP) की स्थापना 2021 में हुई थी, यानी चार साल से थोड़ा ज़्यादा समय पहले। इतने सालों में, AIFAP ने केंद्र और राज्य सरकारों की निजीकरण पॉलिसी के खिलाफ पूरे भारत में अलग-अलग यूनियन और संगठन की एकता बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
भारत में विभिन्न बिजली कर्मियों के यूनियन, जो AIFAP के घटक भी हैं, बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ सक्रिय रूप से संगठित हुए हैं। उल्लेखनीय यह है कि अन्य क्षेत्रों से जुड़े AIFAP के घटकों ने भी यह मांग की है कि बिजली का निजीकरण नहीं किया जाना चाहिए।
AIFAP का निम्नलिखित वक्तव्य स्पष्ट करता है कि भारत के समूचे मजदूर वर्ग और सभी मेहनतकश लोगों को ड्राफ्ट विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 का सक्रिय रूप से विरोध क्यों करना चाहिए।

