सेंट्रल ट्रेड यूनियनों और सेक्टोरल फेडरेशन/एसोसिएशन के जॉइंट प्लेटफॉर्म द्वारा आयोजित राष्ट्रीय श्रमिक सम्मेलन का आह्वान
सरकार सभी रणनीतिक सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों और सार्वजनिक सेवाओं को निजीकरण करने और बेचने के अपने एजेंडे पर चल रही है। अलग-अलग आड़ में किसान विरोधी नीतियां अपनाई जा रही हैं। श्रमिक और किसान लगातार श्रमिक-विरोधी, किसान-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। श्रमिकों के संघर्षों को दबाने और कमजोर करने के लिए चार लेबर कोड लाए गए हैं। ये पूंजीपतियों की उस योजना का हिस्सा हैं, जिसके तहत वे मेहनतकश लोगों की कीमत पर, दुनिया की बड़ी ताकत बनने की अपनी कोशिश में आने वाली सभी रुकावटों को हटाना चाहते हैं। बीज बिल 2025 के ज़रिए किसानों पर और बिजली बिल 2025 के ज़रिए मज़दूरों और किसानों दोनों पर एक बड़ा हमला करने की योजना है। मज़दूरों और किसानों के बुनियादी अधिकारों की मज़बूती से रक्षा करना ज़रूरी है। आगे बढ़ने का एकमात्र तरीका है पूंजीपति वर्ग के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई की एकता को मज़बूत करना।


