मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट
राजस्थान के सरकारी कर्मचारियों ने समान काम का समान वेतन, संविदा और मानदेय पर कार्यरत मज़दूरों की स्थायी नियुक्ति, पुरानी पेंशन की बहाली और अन्य माँगों व निजीकरण का विरोध करने के लिए महारैली आयोजित की।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में 12 जनवरी, 2026 को हज़ारों की संख्या में, 88 विभागों के सरकारी कर्मचारियों ने चेतावनी रैली में भाग लिया। इनमें शिक्षक, स्कीम वर्कर, हेल्थ वर्कर, वन विभाग कर्मी, स्टेनोग्राफर, कृषि मित्र शामिल थे। राजस्थान नर्सिंग महासंघ, राजस्थान शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ, राजस्थान पंचायत शिक्षक संघ, कुक कम हैल्पर संघर्ष समिति-राजस्थान, राजस्थान अधीन सांख्यिकी कर्मचारी संघ, एल.एच.वी.-ए.एन.एम. संघ ऑफ़ राजस्थान, राजस्थान आवासन बोर्ड कर्मचारी संघ, राजस्थान पटवार संघ, राजस्थान क़ानूनगो संघ, राजस्थान शिक्षक संघ (प्रगतिशील), इनके अलावा कई और संगठनों के कर्मियों ने हिस्सा लिया।
चेतावनी रैली की अगुवाई अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने की। यह रैली रामनिवास बाग से चलकर जयपुर के बीचों-बीच कई मार्गों से होते हुये सिविल लाईन्स फाटक पर पहुंची। रैली में प्रदर्शनकारियों ने प्लेकार्ड, झंडे तथा बैनर लिये हुये थे जिन पर उनकी मांगें लिखी हुई थीं। सिविल लाईन्स पहुंचकर यह रैली एक विशाल जनसभा में तब्दील हो गयी।
सभा को संबोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि मज़दूरों के लिये समान काम का समान वेतन, संविदा और मानदेय पर कार्यरत मज़दूरों की स्थायी नियुक्ति हो और पुरानी पेंशन बहाल हो। निजीकरण का विरोध करते हुये उन्होंने कहा कि इससे मज़दूरों और उनके रोज़गार को ख़तरा है।
महासंघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा।
अंत में, पदोन्नति व वेतन विसंगति दूर करवाने; पुरानी पेंशन योजना बहाल करने; संविदा एवं मानदेय कार्मिकों का नियमितिकरण करने; पारदर्शी स्थानांतरण नीति जारी करवाने; निजीकरण को रोकने; कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा करने; आदि की मांगों के साथ एक मांगपत्र राजस्थान के मुख्यमंत्री को दिया गया।
