कामगार एकता कमिटी (KEC) संवाददाता की रिपोर्ट
मुंबई की शहर परिवहन उपक्रम, बेस्ट (BEST) के मज़दूरों ने बेस्ट (BEST) के निजीकरण और बेस्ट (BEST) की ज़मीन और संपत्तियों को बेचने की किसी भी कोशिश को तुरंत रोकने की मांग की है।

10 जनवरी 2026 को, मुंबई की शहर परिवहन उपक्रम, बेस्ट (BEST) की अलग-अलग यूनियनों के मज़दूरों ने बेस्ट (BEST) संयुक्त कामगार कृति समिति के बैनर तले एक बैठक की आयोजन की। इस बैठक में 200 से ज़्यादा मज़दूरों ने हिस्सा लिया और उन मांगों के लिए होने वाले संघर्ष पर चर्चा की, जैसे कि पेंशन जैसे लंबे समय से रुके हुए बकाए का तुरंत भुगतान, निजी ठेकेदारों के साथ सकार्मिक पट्टा के सभी कराररद्द करके बेस्ट (BEST) परिवहन कंपनी के निजीकरण को तुरंत रोकना, बेस्ट (BEST) व्यवस्थापन द्वारा बेस्ट (BEST) की ज़मीन और संपत्ति बेचने की किसी भी कोशिश को तुरंत रोकना, बेस्ट (BEST) के स्वामित्व वाली बसों के बेड़े को मौजूदा 400 से कम से को बढ़ाकर 3300 से ज़्यादा करने के लिए तुरंत निवेश करना, वगैरह थे।
मुंबई के मेहनतकश लोग और कामगार एकता कमिटी और आमची मुंबई आमची बेस्ट (BEST) जैसे कई संगठन भी बेस्ट (BEST) परिवहन उपक्रमके निजीकरण के खिलाफ और बेस्ट (BEST) मज़दूरों के अधिकारों के लिए इस जायज संघर्ष का समर्थन कर रहे हैं।
कामगार एकता कमिटी द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में जारी किए गए बयान की सैकड़ों प्रतिया बांटी गईं।(प्रतिसंलग्न)
बेस्ट मज़दूरों के न्यायपूर्ण संघर्ष का समर्थन करें।
कामगार एकता कमिटी, मुंबई का वक्तव्य, 10 जनवरी 2026
मज़दूर साथियों,
आप सभी बेस्ट (BEST) के अलग-अलग यूनियनों के मज़दूरों ने अपनी जायज़ मांगों के लिए एकसाथ मिलकर संघर्ष करने का फैसला किया है। हम, कामगार एकता कमिटी की तरफ से, आपके इस जायज़ संघर्ष को अपना समर्थन देते हैं। हम मुंबई के सभी मेहनतकश लोगों और उनके संगठनों से भी अपील करते हैं कि वे आपके संघर्ष का समर्थन करें।
आप जो भी मांगें उठा रहे हैं, वे न सिर्फ़ मज़दूरों के तौर पर आपके अधिकारों की रक्षा के लिए हैं, बल्कि मुंबई के उन मेहनतकश लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी हैं जो रोज़ाना काम पर जाने, स्कूल, कॉलेज और दूसरी ज़रूरतों के लिए बेस्ट के बसों पर निर्भर हैं।
बेस्ट (BEST) के स्थायी कर्मचारियों और सेवानिवृत कर्मचारियों को वेतन और पेंशन में देरी समेत कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खबर है कि बेस्ट (BEST) को स्थायी कर्मचारियों के 1500 करोड़ रुपये से ज़्यादा के बकाया का भुगतान अभी करना बाकी है। बेस्ट (BEST) उपक्रम, जिसके बारे में कहा जाता है कि बैंकों में उसके पास करीब 70 हज़ार करोड़ रुपये की स्थायी जमा पूंजी हैं, वह अपने कर्मचारियों को उनकी जायज़ कमाई से कैसे वंचित कर सकती है? इसलिए, लंबे समय से बकाया रकम का ब्याज के साथ तुरंत भुगतान करने की आपकी मांग बिल्कुल सही है।
मज़दूर साथियों,
आप जो दूसरी मांगें उठा रहे हैं, वे असल में 2019 से चल रही बेस्ट (BEST) बससेवाओं के निजीकरण की नीति के खिलाफ हैं। इसके असलमें लागू होनेसे पहलेही, 2017 से आप इस नीति का विरोध कर रहे हैं। आमची मुंबई आमची बेस्ट (हमारा मुंबई, हमारा बेस्ट (BEST)) के बैनर तले मुंबई के मेहनतकश लोगों का एक मंच, और कामगार एकता कमिटी समेत कई दूसरे मज़दूर संगठनों ने बस परिवहन के निजीकरण को तुरंत रोकने की मांग की है।
निजीकरण के कार्यक्रम शुरू होने के बाद से, 150 से ज़्यादा बसमार्गों, जिन्हें फायदेमंद नहीं माना जाता था, बंद कर दिए गए हैं। बाकी मार्गों पर बसों की आवृति कम कर दी गई है। बेस्ट (BEST) के निजी ठेकेदारों ने छोटी बसें भी इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जिसके कारण बसों में बहुत ज़्यादा भीड़ होती है। नतीजतन, रोज़ाना बेस्ट (BEST) बससेवा इस्तेमाल करनेवाले लोगों की संख्या 2009 में 44 लाख से ज़्यादा से घटकर अब लगभग 30 लाख रह गई है।
2007 में बेस्ट (BEST)के पास लगभग 4700 बसें थीं। तब से, बताया जाता है कि बेस्ट (BEST) के पास बसों की संख्या घटकर सिर्फ़ 400 रह गई है, जो मौजूदा लगभग 2600 बसों के कुल बेड़े का सिर्फ़ 16% है।
मज़दूर साथियों,
सकार्मिक पट्टा के सभी करार को तुरंत खत्म करने की आपकी मांग और बेस्ट (BEST) उपक्रमसे तुरंत 3337 बसों तक अपना बेड़ा बढ़ाने के लिए निवेश करने की मांग, मुंबई के सभी कामकाजी लोगों के हित में है।
किसी भी दूसरे सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम की तरह, बेस्ट (BEST) की सभी संपत्ति भी लोगों के पैसे और सालों से लाखों मेहनतकश लोगों की मेहनत से बनी हैं। इसलिए आपकी यह मांग कि बेस्ट (BEST) की कोई भी ज़मीन किसी निजी पूंजीपति को नहीं बेची जानी चाहिए, बिल्कुल सही और एक ज़रूरी मांग है।
मज़दूर साथियों,
1991-92 में उदारीकरण और निजीकरण के ज़रिए वैश्वीकरण के कार्यक्रम शुरू होने के बाद से, लोगों को मिलनेवाली हर सार्वजनिक सेवा, चाहे वह बिजली, पानी की आपूर्ति, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा या यात्री परिवहन हो, उसे सरकारी खजाने पर बोझ माना जाता है। अलग-अलग केंद्र और राज्य सरकारें, चाहे किसी भी राजनीतिक पार्टी की सरकार हो, सार्वजनिक सेवा पर सरकारी खर्च कम करने और उन्हें सीधे या परोक्षरूपसे निजीकरण करने में एक-दूसरे से होड़ कर रही हैं। बेस्ट (BEST)सार्वजनिक परिवहन के साथ भी यही हुआ है। बेस्ट (BEST) परिवहन सेवाओं के निजीकरण के खिलाफ संघर्ष किसी भी ज़रूरी सेवा के निजीकरण के खिलाफ संघर्ष का एक हिस्सा है, चाहे वह रेल या बस परिवहन हो, शिक्षा, स्वास्थ्य या पानी की आपूर्ति हो।
ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे देश का असली शासक पूंजीपतिवर्ग है और अर्थव्यवस्था मज़दूरों, किसानों और दूसरे मेहनतकशों की कीमत पर इनके मुनाफ़े को ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ाने पर केंद्रित है।
कुशल और सस्ता सार्वजनिक परिवहन एक मौलिक अधिकार है जो समाज के सभी सदस्यों का है। इसे सुनिश्चित करना राज्य के बुनियादी कर्तव्यों में से एक है। यह कोई विशेषाधिकार या एहसान नहीं है जिसे एक समय दिया जाए और दूसरे समय छीन लिया जाए। यह सुनिश्चित करने के लिए कि मेहनतकश लोगों के हित सभी नीतियों और कार्यों का एकमात्र लक्ष्य बनें, यह ज़रूरी है कि मज़दूर वर्ग देश का शासक बनने की दिशा में काम करे।
बेस्ट (BEST) कर्मचारियों की सभी मांगें तुरंत पूरी करो !
बेस्ट (BEST) उपक्रम के किसी भी रूप में निजीकरण को खारिज करो !
बेस्ट (BEST) मज़दूरों और मेहनतकश जनता की एकता जिंदाबाद !
