मानेसर में मज़दूरों की हड़ताल

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

गुड़गांव-मानेसर औद्योगिक क्षेत्र में अस्थायी मज़दूर अपने वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी और काम की बेहतर परिस्थितियों की मांग बिल्कुल जायज है। मज़दूर एकता कमेटी पुलिस के हड़ताली मजदूरों पर अत्याचार की निंदा करती है और मज़दूरों की जायज़ मांगों का समर्थन करती है।


गुड़गांव-मानेसर औद्योगिक क्षेत्र में अस्थायी मज़दूर अपने वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी और काम की बेहतर परिस्थितियों की मांग को लेकर 2 अप्रैल से हड़ताल पर हैं। रूप-पोलिमर, रुचिका गारमेंट्स, सत्यम ऑटो, होंडा, मुंजाल शोवा सहित लगभग 10 कंपनियों में अस्थायी मज़दूर हड़ताल पर चले गए हैं। इन मज़दूरों ने अपनी-अपनी कंपनियों के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। हड़ताली मज़दूरों ने प्रबंधन के ख़िलाफ़, अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाये।

मज़दूरों के इस संघर्ष को रोकने के लिये हरियाणा सरकार ने गुड़गांव के मानेसर औद्योगिक क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लगा दी जिसके अनुसार, 5 से अधिक लोग बिना अनुमति इकट्ठा नहीं हो सकते।

9 अप्रैल को मानेसर में एकत्रित मज़दूरों पर लाठीचार्ज किया गया। पुलिस की इस कार्यवाही में कई मज़दूर घायल हो गये है, जबकि एक मज़दूर गंभीर रूप से घायल हो गया है। मज़दूर एकता कमेटी पुलिस के इस अत्याचार की निंदा करती है और मज़दूरों की जायज़ मांगों का समर्थन करती है।

विदित रहे कि हरियाणा के औद्योगिक जिला गुड़गांव में ठेका मज़दूरों को 11 से 12 हज़ार रुपये तक का मामूली मासिक वेतन दिया जाता है, चाहे वे हेल्पर हों, मैकेनिक हों या कुशल श्रमिक। ओवरटाइम का भुगतान भी सिंगल रेट पर किया जाता है। बढ़ती महंगाई के इस दौर में मज़दूरों का जीवन बेहद कठिन हो गया है। पिछले कई साल से उनके वेतन में कोई वृद्धि नहीं की गई है। कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। इसके अतिरिक्त, प्रबंधन द्वारा मज़दूरों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता है एवं नौकरी से निकालने की धमकियां दी जा रही हैं।

गुड़गांव की ट्रेड यूनियनों की काउंसिल ने 9 अप्रैल को सरकार को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें निम्नलिखित मांगों को उठाया गया है:

  • होंडा कंपनी में कैजुअल मज़दूरों के साथ हुए ₹5,000 वेतन बढ़ोतरी सहित कैंटीन में निःशुल्क भोजन, बोनस एवं अन्य सहमत मांगों पर समझौते को तुरंत, पूर्ण एवं ईमानदारी से लागू कराया जाए।
  • हरियाणा राज्य में सभी श्रेणियों के मजदूरों (कैजुअल सहित) के लिए न्यूनतम वेतन 33,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया जाए।
  • स्थायी प्रकृति के कार्यों पर कैजुअल मज़दूरों की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए तथा ऐसे मज़दूरों को स्थायी किया जाए।
  • सभी श्रमिकों को ओवरटाइम का भुगतान क़ानूनन निर्धारित डबल रेट पर सुनिश्चित किया जाए।
  • श्रम क़ानूनों का सख्ती से पालन कराया जाए तथा उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
  • कार्यस्थलों पर मज़दूरों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार पर रोक लगाई जाए और सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
  • मज़दूरों के आंदोलन में पुलिस एवं प्रशासन के नाजायज़ हस्तक्षेप, दबाव और डराने-धमकाने की कार्रवाइयों पर तुरंत रोक लगाई जाए।
  • हड़ताल कर रहे मज़दूरों पर किसी भी प्रकार का प्रबंधन या प्रशासनिक दबाव तुरंत बंद किया जाए।
  • श्रम विभाग को निर्देशित किया जाए कि वह तत्काल हस्तक्षेप कर मज़दूरों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे।
  • आवश्यक खाद्य पदार्थों, विशेष रूप से अंडों की कीमतों पर नियंत्रण हेतु सरकार द्वारा स्पष्ट नीति बनाकर बाज़ार में उचित सरकारी रेट तय किया जाए और उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
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