विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र का बयान
उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी और आभियंता, राज्य की दो वितरण कंपनियों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। बिजली कंपनी प्रशासन की इस हरकत की कड़ी निंदा की जानी चाहिए कि वह सक्रिय मज़दूरों और इंजीनियरों को परेशान करके उनके संघर्ष को कुचलने की कोशिश कर रहा है। इन दोनों वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का निजीकरण, बिजली उपभोक्ताओं और मज़दूरों के हितों के खिलाफ है। पिछले 500 दिनों से लगातार संघर्ष करने और निजीकरण के खिलाफ जन–जागरूकता फैलाने का अभियान चलाने के लिए वे बधाई के पात्र हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण बैठक 12 अप्रैल 2026 को लखनऊ में आयोजित की गई, जिसमें पूरे प्रदेश से 500 से अधिक विद्युत कर्मचारियों और इंजीनियरों, तथा कर्मचारी यूनियनों एवं इंजीनियर्स एसोसिएशनों के सभी पदाधिकारियों ने भाग लिया।
स्पष्ट चेतावनी जारी:
यदि मौजूदा आंदोलन के दौरान बिजली कर्मचारियों के खिलाफ की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयां तत्काल वापस नहीं ली जाती हैं, तो आने वाली गर्मियों में बिजली आपूर्ति में होने वाली किसी भी बाधा के लिए बिजली निगम का शीर्ष प्रबंधन पूरी तरह से जिम्मेदार होगा।
यह चेतावनी भी दी गई कि यदि प्रबंधन की नाकामियों को छिपाने के लिए किसी भी कर्मचारी या आभियंता को आगे और परेशान किया गया, तो बिजली कर्मचारी काम बंद करके बाहर आने पर मजबूर हो जाएँगे, और इसकी पूरी ज़िम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
राज्यव्यापी “जन–जागरण अभियान” की घोषणा।
15 अप्रैल से 21 मई तक, पूरे उत्तर प्रदेश में एक विशाल जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
हर ज़िले में उपभोक्ताओं और किसानों के साथ संयुक्त बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि उन पर हो रहे लगातार उत्पीड़न को उजागर किया जा सके और यह बात सामने लाई जा सके कि 501 दिनों के निरंतर संघर्ष के बावजूद, कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं को निर्बाध सेवा सुनिश्चित की है।
प्रमुख विरोध कार्यक्रम
- 24अप्रैल – मेरठ वितरण कंपनी
- 2मई – KESCO
- 6मई – आगरा वितरण कंपनी
- 14मई – लखनऊ वितरण कंपनी
- 21मई – वाराणसी वितरण कंपनी
- सभी वितरण कंपनी मुख्यालयों पर ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएँगे।
उठाए गए मुख्य मुद्दे:
- कर्मचारियों का लगातार उत्पीड़न
- संविदा कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी
- “वर्टिकल रीस्ट्रक्चरिंग” के तहत नियमित कार्यबल में कमी
- विद्युत आपूर्ति प्रणाली के लिए गंभीर खतरा
मुख्य माँगें:
- उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए
- अनुभवी संविदा कर्मचारियों की बहाली की जाए
- गर्मी के मौसम में बिजली की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आगे किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को रोका जाए
बिजली कर्मचारियों ने एक बार फिर दोहराया है कि वे उपभोक्ताओं और किसानों के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं, और उन्होंने संघर्ष के 501 दिनों के दौरान भी निर्बाध सेवाएँ सुनिश्चित की हैं। हालाँकि, प्रबंधन का लगातार दमनकारी रवैया स्थिति को संकट की ओर धकेल रहा है।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री द्वारा ऐसे कदमों को वापस लेने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद, न केवल उन निर्देशों की अनदेखी की गई, बल्कि उत्पीड़न के नए उपाय भी लिए जा रहे हैं—जो निजीकरण की ओर बढ़ते रुझान का संकेत देते हैं।
अंतिम संदेश:
यदि तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो गंभीर परिणाम अवश्यंभावी हैं।
संघर्ष जारी है — न्याय की जीत होकर रहेगी!
इंकलाब ज़िंदाबाद!
