कामगार एकता कमिटी (केईसी) संवाददाता की रिपोर्ट

पिछले कुछ दिनों में, उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। फतेहपुर, लखनऊ, मेरठ, कानपुर, आगरा, हमीरपुर, बांदा, अलीगढ़, फिरोजाबाद, हाथरस और अन्य शहरों में सैकड़ों महिलाएं और पुरुष सड़कों पर उतर आए और उन स्मार्ट मीटरों को फेंक दिया जिन्हें उन पर जबरन थोपा गया था। नागरिक बढ़े हुए बिजली बिलों और इन “लूट मीटरों” द्वारा सक्षम की गई स्वचालित बिजली कटौती के खिलाफ विरोध कर रहे थे।
गौरतलब है कि यूपी में उपभोक्ताओं, किसानों और बिजली कर्मियों ने स्मार्ट मीटरों के खिलाफ कई प्रदर्शन और विरोध आयोजित किए हैं। हाल ही में, 27 अप्रैल को राज्य के किसानों ने स्मार्ट मीटरों और बिजली के निजीकरण को वापस लेने की मांग को लेकर एक विशाल प्रदर्शन किया। बिजली कर्मी लगातार सार्वजनिक लूट के जरिए निजी मुनाफे के सभी रूपों का विरोध कर रहे हैं, जिनमें स्मार्ट मीटर भी शामिल हैं।
इस व्यापक विरोध ने यूपी सरकार को स्मार्ट प्रीपेड मीटर वापस लेने पर मजबूर कर दिया है। यूपी के बिजली मंत्री को यह घोषणा करने पर मजबूर होना पड़ा कि पहले से लगाए गए सभी स्मार्ट मीटर अब प्रीपेड मोड में काम नहीं करेंगे और उपभोक्ता पहले की तरह ही बिलों का भुगतान करते रहेंगे। अर्थात, एक कैलेंडर महीने की खपत के लिए उपभोक्ताओं को अगले महीने के पहले दस दिनों में बिल मिलेगा, और फिर उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर उसका भुगतान करना होगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि मौजूदा मीटरों को जबरन स्मार्ट मीटरों से नहीं बदला जाएगा। यह ध्यान देने योग्य है कि राज्य के 3.5 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं में से 87 लाख के पास स्मार्ट मीटर हैं और 75 लाख के पास प्रीपेड स्मार्ट मीटर हैं।
यह राज्य के सभी मेहनतकश और श्रमजीवी लोगों की एक बड़ी जीत है। बिजली कर्मियों और उपभोक्ताओं को यूपी के लोगों से प्रेरणा लेनी चाहिए और इसी तरह स्मार्ट मीटरों तथा निजीकरण के सभी रूपों के खिलाफ संयुक्त विरोध संगठित करना चाहिए। आइए, हम एकजुट होकर जनता की इस लूट का विरोध करें!
