भारतीय रेलवे न तो अपने कर्मचारियों की सेहत की परवाह करती है और न ही यात्रियों की सुरक्षा की

कामगार एकता कमिटी का बयान, जून २०२६

भारतीय रेलवे के अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को, चाहे वे किसी भी यूनियन या एसोसिएशन से जुड़े हों, एक आवाज़ में रिक्त पदों को भरने मांग उठानी होगी। उन्हें इस मुद्दे पर अपनी एकजुट कार्रवाई पर पुराने अंतरों का बुरा असर नहीं पड़ने देना चाहिए। उन्हें उन संगठनों का और आम लोगों का समर्थन भी हासिल करने की ज़रूरत है जो यात्रा के लिए रेलवे का इस्तेमाल करते हैं।

रेलवे कर्मचारी कई वर्षों से, अलग-अलग कैटेगरी में बड़ी संख्या में रिक्त पदों को भरने की मांग कर रहे हैं, जो इसके विशाल नेटवर्क को सुरक्षित और सुचारू रूप से चलाने के लिए ज़रूरी है। ज़्यादातर रेल कर्मचारियों पर काम का बोझ असहनीय हो गया है। इस समस्या को हल करने के बजाय, रेलवे प्रशासन कर्मचारियों और यात्रियों की सेहत और सुरक्षा की परवाह किए बिना कर्मचारियों की संख्या और कम करना चाहता

हालात बहुत चिंताजनक हैं।

यहां कुछ चौंकाने वाले तथ्य दिए गए हैं उन्हें गौर से पढ़िए ।

1. पिछले कुछ वर्षों में रिक्त पोस्ट की संख्या कम होने के बजाय बढ़ी है।

– २०१५ में नॉन-गैजेटेड (अराजपत्रित) रिक्त पोस्ट की संख्या १.४ लाख थी जो १ जून २०२३ तक बढ़कर 2.74 लाख हो गई ।

– सेफ्टी कैटेगरी में खाली पोस्ट की संख्या: १.७८ लाख।

(इंडियन रेलवे द्वारा जून २०२३ में एक RTI सवाल को दिए हुए जवाब के अनुसार)

2. रोज़ाना चलने वाली ट्रेनों की संख्या:

यात्री ट्रेन की संख्या

मालगाड़ियों की संख्या

२०१४-१५

१३,०९८

७,०००

२०२४-२५

१३,९४०

११,६३१

% बढ़ोतरी

६.५

६६

फिर भी, स्वीकृत संख्या में वृद्धि नहीं की गई है।

3. भारतीय रेलवे ने २०१४-१५ और २०२४-२५ के बीच ५.०८ लाख कर्मचारियों की भर्ती की, यानी औसतन हर साल सिर्फ़ ४६,१८२ कर्मचारियों की भर्ती की गई।

4. हर साल भारतीय रेलवे से लगभग ३०,००० से ५०,००० कर्मचारी रिटायर होते हैं। (सेंट्रलाइज़्ड ‘एडवांस्ड रेलवे पेंशन एक्सेस’ (ARPAN) हर साल रिटायर होने वाले लगभग ५०,००० कर्मचारियों के पेंशन सेटलमेंट की प्रक्रिया पूरी करता है।)

5. सालाना भर्ती से सिर्फ़ रिटायरमेंट की भरपाई होती है। रिक्त पदों की संख्या या तो उतनी ही रहती है या बढ़ जाती है।

6. इसके अलावा, रेलवे प्रशासन हर साल अपने कर्मचारियों की संख्या में % की कमी करना चाहता है। २०२६-२७ के लिए, रेलवे प्रशासन ने सभी ज़ोन और दूसरी इकाइयों को २९,६०० से ज़्यादा पद सरेंडर करने का लक्ष्य दिया है।

7. कर्मचारियों पर तनाव कितना असहनीय है, यह तब साफ़ हो गया जब कुछ महिने पहले मध्य रेलवे के मुंबई डिवीज़न में ७२ लोको पायलटों ने स्वैच्छिक रिटायरमेंट के लिए आवेदन दिए!

8. लोको पायलटों से नियमित रूप से 10 से 14 घंटे काम कराया जाता है। उन्हें रेलवे के अपने नियमों के खिलाफ लगातार तीन या चार नाइट शिफ्ट ड्यूटी करने के लिए मजबूर किया जाता है। लोको पायलटों के १९% पद रिक्त हैं।

9. कभी-कभी स्टाफ़ की कमी के कारण मालगाड़ियाँ बिना ट्रेन मैनेजर (गार्ड) के चलाई जाती हैं। ट्रेन मैनेजर के २७% पद रिक्त हैं।

10. महत्वपूर्ण सिग्नल और रखरखाव कर्मचारियों के रिक्त पद ३०% है।

11. हर साल ट्रैक पर काम करने वाले ५०० से ज़्यादा ट्रैक मेंटेनर्स की जान चली जाती है क्योंकि उन्हें आने वाली ट्रेनों के बारे में चेतावनी देने के लिए कोई व्यक्ति नहीं होता, क्योंकि ३१% पद रिक्त हैं। साथ ही, उन्हें आने वाली ट्रेनों के बारे में चेतावनी देने के लिए ‘रक्षक’ डिवाइस भी नहीं दिया जाता है।

12. ट्रेनों की संख्या में बढ़ोतरी को संभालने के लिए लगभग २०% और स्टेशन मैनेजरों की ज़रूरत है।

भारतीय रेलवे के अलग-अलग कैटेगरी के कर्मचारी लगातार रिक्त पदों को भरने की सबसे अहम मांग उठा रहे हैं। हालांकि, यह साफ़ होता जा रहा है कि सिर्फ़ इतना ही काफ़ी नहीं है। भारतीय रेलवे के अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को, चाहे वे किसी भी यूनियन या एसोसिएशन से जुड़े हों, एक आवाज़ में यह मांग उठानी होगी। उन्हें इस मुद्दे पर अपनी एकजुट कार्रवाई पर पुराने अंतरों का बुरा असर नहीं पड़ने देना चाहिए। तभी रेलवे प्रशासन उनकी बात मानेगा।

रिक्त पदों के कारण काम का माहौल बहुत तनावपूर्ण हो जाता है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवार सहित यात्रियों की सुरक्षा पर भी असर पड़ता है। इसलिए, भारतीय रेलवे के कर्मचारियों को उन संगठनों का और आम लोगों का समर्थन हासिल करने की ज़रूरत है जो यात्रा के लिए रेलवे का इस्तेमाल करते हैं।

एक पर हमला, सब पर हमला!

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