मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

मज़दूर एकता कमेटी ने 21 जून, 2026 को दक्षिण दिल्ली में एक सभा का आयोजन किया। सभा में बड़ी संख्या में वस्त्र उद्योग की महिला मज़दूर व घरेलू कामगार महिला मज़दूर शामिल हुईं।
मज़दूर एकता कमेटी की एक नौजवान महिला साथी ने सभा की अध्यक्षता करते हुये, सभी का स्वागत किया। एक महिला साथी ने सम्मान से जीवन जीने लायक वेतन पर प्रस्तुति पेश की।
प्रस्तुति में बताया गया कि मज़दूर वर्ग अपनी श्रम शक्ति के बल पर देश की दौलत पैदा करता है। परंतु उन्हें सम्मान से जीने लायक वेतन नहीं मिलता है। मज़दूर ग़रीबी एवं कुपोषण की दलदल में फंसते जा रहे हैं।
उन्होंने प्रस्तुति में समझाया कि दिल्ली के अकुशल मज़दूर के लिए न्यूनतम वेतन 18,456 रुपये है। दो साल से दिल्ली सरकार ने डीए (महंगाई भत्ता) नहीं बढ़ाया है। यदि सरकार महंगाई भत्ता बढ़ा देती तो यह वेतन, अकुशल, अर्धकुशल तथा कुशल मज़दूरों को 19378 से लेकर 25573 रुपये तक मिल रहा होता।
क़ानूनी न्यूनतम वेतन को लेकर दूसरा सच यह है कि दिल्ली के 90 प्रतिशत मज़दूरों को सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है। इसके चलते मज़दूर पोषण से भरपूर भोजन – दूध, हरी सब्जी, पनीर, मांस, मछली आदि जैसी चीजें न खुद खा पाता है न ही परिवार को खिला पाता है। न ही वह सभी बुनियादी सुविधाओं से संपन्न एक अच्छे मकान में किराये पर रह सकता है। कम वेतन मिलने से मज़दूरों की ख़रीद की क्षमता कम हो जाती है। इसके कारण वे अपने जीवन की ज़रूरतों में कटौती करते हैं।
सम्मान से जीने लायक वेतन हमारा अधिकार है और इसके लिए हमारा संघर्ष पूरी तरह जायज़ है। अलग-अलग क्षेत्रों के मज़दूरों को एकजुट करके, हमें इस संघर्ष को आगे ले जाना होगा – इस आह्वान के साथ प्रस्तुति समाप्त हुयी।
सभा में शामिल महिला मजदूरों ने अपने अनुभवों को सांझा किया। महिला सिलाई कारीगरों ने बताया कि उन्हें पुरुष मज़दूरों के बराबर वेतन नहीं मिलता है। महिलाओं को 12 घंटे काम के लिए 600 रुपये दिहाड़ी दी जाती है। वहीं पुरुष मज़दूरों को उसी काम के लिये 12 घंटे के लिए 770 रुपये दिये जाते हैं। यानी समान काम का समान वेतन नहीं मिलता है। वस्त्र उद्योग में धागा काटने का काम करने वाली महिला ने बताया कि उनकी कंपनी में कागज पर 18,000 रुपए वेतन पर हस्ताक्षर करवाया जाता है जबकि मिलता 12,000 रुपए है।
घरेलू कामगार महिला मज़दूर ने बोला कि हम वेतन या अधिकार के लिए आवाज़ उठाते हैं, तो मालिक काम से निकाल देता है या पुलिस दमन करती है। जब तक हम आवाज़ नहीं उठाएंगे, हमारे अधिकारों का हनन होता रहेगा, इसलिये हमें औद्योगिक क्षेत्र के सभी मज़दूरों को एक साथ जोड़कर सम्मान से जीवन जीने लायक वेतन के लिये लड़ना होगा।
मज़दूरों ने कहा कि यह प्रस्तुति बहुत ही अच्छी है। यह सभी मज़दूरों के ज्ञान को बढ़ाती है। इसे सभी मज़दूरों की ज़िन्दगी से जोड़कर बनाया गया है। इस प्रस्तुति में मज़दूरों का जीवन कैसे चलता है अच्छे से समझाया गया है। इस प्रस्तुति को अन्य सभी मज़दूर कालोनियों में भी दिखाना चाहिये।
