बिजली कर्मचारियों की यूनियनें, लेबर कोड और बिजली के निजीकरण का विरोध करने के लिए सेंट्रल ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के संयुक्त राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होने की योजना बना रही हैं।

ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉईज़ (AIFEE) का अपने घटक संगठनों को परिपत्र

(अंग्रेजी परिपत्र का अनुवाद)

नागपुर : 07/07/2026

AIFEE के सभी राज्य घटकों के लिए परिपत्र

प्रिय कॉमरेड,

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच तथा संयुक्त किसान मोर्चा ने 29 जुलाई 2026 को प्रातः 10:30 बजे नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में अपने संबद्ध यूनियनों, महासंघों तथा संयुक्त किसान मोर्चा के किसानों का एक दिवसीय संयुक्त राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया हैचर्चा और निर्णय के लिए सूचीबद्ध मुद्दे विद्युत क्षेत्र के बिजली कर्मियों और अभियंताओं से भी संबंधित हैंइसलिए, AiFEE की ओर से हमारे पदाधिकारियों, अभियंताओं और कार्यकर्ताओं को भी इस संयुक्त सम्मेलन में भाग लेना चाहिएइससे हमें निजीकरण के विरुद्ध आंदोलन के आह्वान को संगठित करने में लाभ मिलेगासम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श और लिए गए निर्णय निजीकरण के विरुद्ध एकता को और अधिक मजबूत करने के लिए हमारे कर्नाटक के समकक्ष साथियों का मनोबल बढ़ाने में सहायक होंगे

इस सम्मेलन में मज़दूर वर्ग और उनके यूनियनों के सामनेरहे इन अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी

1) विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्रों, जैसे विद्युत क्षेत्र आदि, का निजीकरण

2) निजीकरण का विरोध करने के लिए भविष्य की कार्ययोजना

3) 4 श्रम संहिताओं के प्रभाव और हमारे आंदोलन का मार्ग

4) ठेका प्रथा में वृद्धि

5) न्यूनतम वेतन का मुद्दा

6) विनिवेश

7) विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025

यह सम्मेलन भारतीय श्रमिक वर्ग और विद्युत क्षेत्र से संबंधित उपर्युक्त महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श करेगा

चूँकि यह एक संयुक्त सम्मेलन है, इसलिए संयुक्त किसान मोर्चा के नेता भी केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण किसानों की उपेक्षा और कठिनाइयों पर चर्चा करेंगे तथा आगे की कार्ययोजना का प्रस्ताव रखेंगेयहाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि सरकार की मजदूर-विरोधी, जन-विरोधी और किसान-विरोधी नीतियों को पलटने के लिए इन सभी वर्गों की एकता और संयुक्त संघर्ष आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है

चर्चाओं के आधार पर आयोजित यह सम्मेलन एक घोषणा-पत्र को अपनाएगावर्तमान गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए यह प्रस्तावित है कि घटक यूनियनों के अध्यक्ष एवं महासचिव इस राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लें, ताकि सम्मेलन का संदेश और लिए गए निर्णय जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं तक पहुँचाए जा सकें तथा निर्धारित आंदोलनात्मक कार्यक्रमों के सफल संचालन और जन-संगठन के लिए उन्हें संगठित किया जा सके

सादर

मोहन शर्मा

महासचिव

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