मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

29 जुलाई 2026 को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में मज़दूरों और किसानों का राष्ट्रीय अधिवेशन नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में संपन्न हुआ।
इस अधिवेशन में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों से 5 हज़ार से ज्यादा मज़दूरों और किसानों की विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें औद्योगिक मज़दूर, सार्वजनिक क्षेत्र के मज़दूर, परिवहन मज़दूर, बैंक और बीमा कर्मचारी, शिक्षक, सरकारी मज़दूर, पीस रेट पर काम करने वाले मज़दूर, गिग और प्लेटफॉर्म मज़दूर, स्कीम मज़दूर (आंगनवाड़ी, आशाकर्मी, आदि) और अनौपचारिक क्षेत्रों के मज़दूर संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।

अधिवेशन स्थल, नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में मज़दूरों-किसानों की मांगों के नारों के बैनर चारों ओर लगे हुये थे। मज़दूर और किसान व्यक्तिगत तथा सामूहिक रूप से बैनरों के साथ तस्वीरें ले रहे थे। बैनरों पर हिंदी व अंग्रेजी में लिखे नारे थे – “बढ़ती महंगाई से जनता त्रस्त, सरकार पूंजीपतियों की जेब भरने में मस्त!”, “मज़दूरों और किसानों की हुकूमत स्थापित करने के लिए संघर्ष करें!”, “बैंक, रेल, बीमा, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा को बेचना बंद करो!”, “लोगों के हित में संघर्ष करने वालों की आवाज़ों को दबाना बंद करो!”, “देश की दौलत पैदा करने वालों को देश का मालिक बनना होगा!”, “पूंजीपति वर्ग का भ्रष्ट और परजीवी शासन मुर्दाबाद!”, “निजीकरण, उदारीकरण और भूमंडलीकरण के ख़िलाफ़ एकजुट संघर्ष को तेज़ करें!”, “सम्मान से जीवन जीने लायक वेतन के लिए संघर्ष करें!”, और “मज़दूर-किसान एकता ज़िंदाबाद!”

इस अवसर पर अधिवेशन में आने वाले प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मज़दूर एकता कमेटी के बयान की हजारों प्रतियां बांटी गईं। (मज़दूर एकता कमेटी के बयान को https://hindi.aifap.org.in/17462/ पर पढ़िए।)
अधिवेशन की अध्यक्षता केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा ने की। इन संगठनों के नेताओं ने सभा को संबोधित किया।
अधिवेशन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने पूंजीपति वर्ग और उनकी सरकारों के मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और जन-विरोधी नीतियों की एक आवाज़ में निंदा की। उन्होंने केंद्र और राज्य की सरकारों की सांप्रदायिक व जातिगत आधार पर लोगों को बांटने की निंदा की।
अधिवेशन में वक्ताओं ने गंभीर आर्थिक संकट, बढ़ती बेरोज़गारी, अभूतपूर्व मूल्य वृद्धि, सार्वजनिक उपक्रमों और सेवाओं के निजीकरण, चार श्रम संहिताओं के माध्यम से ट्रेड यूनियन अधिकारों पर हमलों, किसानों की मांगों की अनदेखी और देशी-विदेशी पूंजीपतियों के हित में किए जा रहे विदेश व्यापार समझौतों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई।
उन्होंने कहा कि सरकार मज़दूरों, किसानों, छात्रों व नौजवानों पर हमला व दमन कर रही है। उन्होंने रोज़ी-रोटी के अधिकारों की हिफ़ाज़त में और सही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा पाने के अधिकार की रक्षा के लिए एकजुट संघर्ष का आह्वान किया।
अधिवेशन में सर्वसम्मति से निम्नलिखित मांगों और प्रस्तावों को अपनाया गया:
- चारों श्रम संहिताओं को निरस्त करना और ट्रेड यूनियन अधिकारों की गारंटी देना।
- महंगाई भत्ते से जुड़े 42,000 रुपये की वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करना।
- न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फ़सल ख़रीद की क़ानूनी गारंटी देना।
- विदेश व्यापार समझौतों को रद्द करना और निजीकरण पर रोक लगाना।
- मनरेगा को बहाल और मजबूत करना तथा सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करना।
- रोजगार सृजन, सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना।
अधिवेशन ने आगामी 10 अगस्त 2026 को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। इसके तहत जिला व राज्य-स्तरीय प्रदर्शनों, रेल रोको, रास्ता रोको, कार्यस्थल पर विरोध, मानव श्रृंखला और शांतिपूर्ण जन-आंदोलनों के अन्य रूपों के माध्यम से मज़दूर-किसान लामबंदी तेज़ करने का निर्णय लिया गया।
मज़दूरों और किसानों की एकता को मजबूत करने तथा संघर्ष को और तेज़ करने के दृढ़ संकल्प के साथ अधिवेशन का समापन हुआ।
