मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

10 अगस्त, 2026 को मज़दूरों और किसानों की यूनियनों की अगुवाई में देश के 1,000 से अधिक स्थानों पर विरोध दिवस मनाया गया। पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, झारखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में जिला तथा ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन, रैलियां, महापंचायतें तथा कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर, विरोध दर्ज़ किया गया। यह कार्यक्रम 29 जुलाई को दिल्ली में हुए मज़दूरों-किसानों के अधिवेशन के बुलावे पर किया गया था।
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘देश-बचाओ, जनता बचाओ’ शीर्षक से विरोध सभा आयोजित की गई। प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में प्लेकार्ड पकड़े हुये थे, जिन पर लिखा था – “बढ़ती महंगाई से जनता त्रस्त, सरकार पूंजीपतियों की जेब भरने में मस्त!”, “बैंक, रेल, बीमा, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा को बेचना बंद करो!”, “निजीकरण, उदारीकरण और भूमंडलीकरण के ख़िलाफ़ एकजुट संघर्ष को तेज़ करें!”, “मज़दूरों को गुलाम बनाने वाले चार लेबर कोड रद्द करो!”, “स्थायी काम में ठेकेदारी ख़त्म करो!”, “यूएपीए क़ानून वापस लो!”, “देश की दौलत पैदा करने वालों को देश का मालिक बनना होगा!”, “मज़दूरों और किसानों की हुकूमत स्थापित करने के लिए संघर्ष करें!”
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केन्द्र सरकार की मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और जन-विरोधी नीतियों की जमकर निंदा की।
उन्होंने कहा कि अमरीका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता, चार लेबर कोड, बिजली का निजीकरण, बीज क़ानून और भूमि अधिग्रहण जैसी नीतियां, मजदूरों और किसानों पर सीधा हमला हैं।

मज़दूर एकता कमेटी के कामरेड संतोष कुमार ने कहा कि मज़दूर किसान चाहते हैं कि पूंजीपति वर्ग की मौजूदा भाजपा सरकार को हटाया जाये। लोगों के सामने सवाल है कि उसकी जगह पर किसका राज होना चाहिये? यदि पूंजीपति वर्ग की ही दूसरी पार्टी सरकार बनाती है तो यह मज़दूरों और किसानों के लिए घातक होगा। हमें मज़दूरों और किसानों को जागृत करना चाहिये कि पूंजीपति वर्ग के राज के बदले में मज़दूरों और किसानों का राज स्थापित किया जाये। आज देश के मज़दूर और किसान जिन-जिन समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनका समाधान मज़दूरों और किसानों के राज में ही है।
संयुक्त किसान मोर्चा की आगे की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए किसान नेताओं ने कहा कि 17 अगस्त को प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता, मुख्यमंत्रियों, सांसदों और विधायकों को मांगपत्र सौंपे जाएंगे। 3 अक्तूबर को लखीमपुर खीरी के शहीद किसानों की स्मृति में देशव्यापी कार्यक्रम होंगे। 26 नवंबर से दिल्ली समेत देशभर में बहुदिवसीय किसान आंदोलन चलाया जाएगा, जो प्रमुख मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा। इसके बाद राज्यों में सम्मेलन, पदयात्राएं, ट्रैक्टर मार्च, महापंचायतें और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को संबोधित करने वालों में थे – आल इंडिया एग्रीकल्चर वर्कर्स यूनियन से वी सिवदासन (सांसद), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस से विद्यासागर गिरी, मज़दूर एकता कमेटी से संतोष कुमार, हिंद मजदूर सभा से राजेन्द्र सिंह, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस से ए आर सिंधू, ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर से आरके शर्मा, ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर से धर्मेन्द्र कुमार वर्मा, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस से सुचेता डे, इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस से अशोक सिंह, लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन से जवाहर, यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस से आर एस डागर, इंडियन काऊंसिल आफ ट्रेड यूनियंस से नरेन्द्र, आल इंडिया किसान सभा (अजय भवन) से हरीश बाला, भारतीय किसान यूनियन (दिल्ली) से राजबीर, नौजवान कार्यकर्ता आईषी घोष।
विरोध दिवस में निम्नलिखित प्रमुख मांगों को उठाया गया:
- चार श्रम संहिताओं को निरस्त किया जाये और ट्रेड यूनियन अधिकारों की गारंटी दी जाये।
- महंगाई भत्ते से जुड़े 42,000 रुपये के वैधानिक न्यूनतम वेतन को सुनिश्चित किया जाये।
- न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फ़सल की ख़रीद की क़ानूनी गारंटी दी जाये।
- विदेश व्यापार समझौतों को रद्द किया जाये तथा निजीकरण पर लगाई जाये।
- मनरेगा को बहाल किया जाये तथा सामाजिक सुरक्षा का विस्तार किया जाये।
- रोजगार सृजन, सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाया जाये।
