ऑल इंडिया रेलवे ट्रैकमेंटेनर यूनियन का रेलवे बोर्ड को मांगपत्र

रेल मजदूरों में शायद सबसे उपेक्षित तबका रेल्वे ट्रेक मेंटेनरों का हैI रेल यात्रियों का ध्यान भी शायद ही इन मजदूरों की ओर जाता हैI मगर रेल पटरियों की मरम्मत करना यह बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानेवाले इन मजदूर भाइयों एवं बहनों के साथ रेल प्रशासन बहुत घटिया रूख अपनाता हैI
उन्हें 18 किलोमीटर की रात्रि गश्त (Night Patrolling) की ड्यूटी सौपी जाती है जो पूरी तरह अव्यावहारिक तथा शारीरिक प्रताड़ना हैI इसे फौरी तौर पर घटाकर 10-12 किलोमीटर करने के लिए एक मांगपत्र ऑल इंडिया रेलवे ट्रैकमेंटेनर यूनियन (AIRTU) ने रेलवे बोर्ड को दिया हैI (संलग्न)
18 किलोमीटर की रात्रि गश्त अव्यावहारिक क्यों है यह मांगपत्र में बड़े आसान तरीके से, जो स्कूल जानेवाला बच्चा भी समझ सकता है, समझाया गया हैI
समझिए गणित, कड़ाके की ठंड और घने कोहरे में 20 किलो से अधिक का सुरक्षा भार लेकर चलने में शुद्ध रूप से 8 घंटे 20 मिनट का समय लगता है। रात में गुजरने वाली लगभग 20 ट्रेनों से सुरक्षा हेतु ट्रैक से हटने-बचने में 1 घंटा 40 मिनट नष्ट होते हैं। गेटकीपर, स्टेशन मास्टर और विपरीत दिशा के साथी से सुरक्षा बुक्स पर साइन कराने में 1 घंटा लगता है। कुल मिलाकर 8 घंटे की ड्यूटी में 11 घंटे का काम थोपा जा रहा है, जो IRPWM और HOER नियमों का खुला उल्लंघन है।
मांगपत्र में निम्नलिखित माँगे की गई हैं:
✅ रात्रि गश्त की दूरी अधिकतम 10-12 KM की जाए।
✅ कोहरे और ऑटो-सिग्नलिंग वाले क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से डबल पेट्रोलिंग (दो कर्मचारी) लागू हो।
✅ लगातार 3 दिनों से अधिक नाइट ड्यूटी न लगाई जाए और उचित विश्राम मिले।
✅ आपातकालीन स्थिति में 8 घंटे से अधिक कार्य होने पर तुरंत ओवरटाइम (OT) का भुगतान हो।

