मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

23 अगस्त को अपनी लंबित और न्यायसंगत मांगों को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) की अगुवाई में देशभर के क़रीब 8 लाख बैंक कर्मचारियों ने बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
यह देशव्यापी आंदोलन 24 अगस्त से शुरू होकर 26 अक्तूबर को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदलेगा। इसके तहत निम्नलिखित चरणों में विरोध प्रदर्शन किया जाएगाः
- आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ने और केवल निर्धारित कार्य घंटों तक काम करने जैसे क़दम उठाएंगे।
- 11 सितंबर 2026 को एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल।
- 28 से 30 सितंबर 2026 को तीन दिनों की देशव्यापी हड़ताल।
- 26 अक्तूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल।
यूनियनों ने कहा कि सरकार ने लंबे समय से उनकी मांगों को नज़रंदाज़ किया है।

UFBU में बैक कर्मचारियों की 7 यूनियनें शामिल हैं – आल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसियशन, आल इंडिया बैंक ओफिसर्स कंफेडरेशन, नेशनल कंफेडरेशन आफ बैंक इंप्लाइज, आल इडिया बैंक ओफिसर्स एसोसियशन, बैंक इंप्लाइज फेडरेशन आफ इंडिया, इंडियन नेशनल बैंक इंप्लाइज फेडरेशन और इंडियन नेशनल बैंक ओफिसर्स कांग्रेस।
बैंक कर्मचारियों की मुख्य मांगें हैं:
1. फाइव-डे वर्क वीक (सप्ताह में पांच दिन काम) लागू करना
बैंक यूनियनें पिछले 15 वर्षों से बैंकिंग क्षेत्र में सप्ताह में पांच दिन काम करने की मांग उठा रही हैं। इस मुद्दे पर बैंक कर्मचारी यूनियनों और बैंक प्रबंधकों के संगठन, भारतीय बैंक संघ के बीच पहले ही सहमति बन चुकी है, लेकिन सरकार की मंजूरी न मिलने के कारण इसे लागू नहीं किया गया है।
2. परफारर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना को रद्द करना
कर्मचारियों ने PLI योजना को रद्द करने की मांग की है।
यूनियनों का तर्क है कि बैंकिंग एक सामूहिक काम (टीम वर्क) है, लेकिन नई व्यवस्था व्यक्तिगत प्रदर्शन पर ज़ोर देकर पक्षपात और भेदभाव को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा, अंधाधुंध व्यक्तिगत टारगेट पूरा करने के चक्कर में अनुचित ऋण वितरण और बैंकिंग जोखि़म बढ़ने की भी आशंका है।
