सम्मान से जीने लायक वेतन के अधिकार पर विचार गोष्ठी

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

मज़दूर एकता कमेटी ने 20 सितंबर 2026 को दक्षिण दिल्ली के जसौला में एक सभा का आयोजन किया। सभा में गारमेंट व इलेक्ट्रिकल क्षेत्रों, मास कम्युनिकेशन व शिक्षा संस्थानों के मज़दरों, घरेलू कामगारों, आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और नौजवानों ने हिस्सा लिया।

मंच संचालक ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि आज मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था में कंपनी, कारखाना, दफ्तर, दुकान और मॉल में काम करने वाले मजदूरों को न्यूनतम वेतन से कम वेतनों पर काम करना पड़ता है। यही नहीं, केन्द्र या राज्य सरकारों के अधीन विभिन्न सरकारी योजनाओं में कार्यरत स्कीम मजदूरों को मात्र 7-8 हज़ार रुपये का मानदेय ही दिया रहा है। श्रम की इस लूट के विरोध में बीते कई महीनों से मज़दूर एकता कमेटी दिल्ली के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में ‘सम्मान से जीने लायक वेतन हमारा अधिकार!’ के बैनर तले अभियान चला रही है। आज की यह गोष्ठी भी इसी अभियान का एक हिस्सा है।

मजदूर एकता कमेटी द्वारा की गयी मुख्य प्रस्तुती में बताया गया कि मज़दूर ही अपनी श्रम शक्ति के बल पर देश की दौलत पैदा करता है। परन्तु मज़दूर को इस दौलत का उतना ही हिस्सा वेतन के रूप में दिया जाता है ताकि वह जिन्दा रहे और अगले दिन काम पर आ सके। इस तरह से वह कड़ी मेहनत करके भी पूरी जिंदगी बदहाली व कुपोषण के दलदल में फंसा रहता है।

दिल्ली में सरकार द्वारा घोषित कानूनी न्यूनतम वेतन अपने आप में इतना कम है कि मजदूर अपने परिवार को  पोषण युक्त भोजन — दूध, दही, अंडा, हरी सब्जियां, दालें आदि — जैसी चीजें नहीं खिला पाता है और न ही खुद खा पाता है। न ही वह अच्छे मकान में रह सकता है, जहां पर सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों। ऐसे में, यदि उसे घोषित न्यूनतम वेतन से भी कम मिले तो मज़दूरों की जीवन की ज़रूरी वस्तुएं  खरीदने की क्षमता और भी कम हो जाती है।

प्रस्तुति में समझाया गया कि मजदूर वर्ग की एकता को तोड़ने के लिए हुक्मरान पूंजीपति वर्ग और उनकी सरकारें मजदूरों को ऑफिसर, पार्टनर, स्कीम वर्कर जैसे अलग-अलग नाम देती हैं, ताकि मज़दूर  एकजुट होकर अपने सांझे अधिकारों के लिए आवाज़  न उठा सकें।

कई घरेलू कामगारों, आशा कर्मियों और निजी स्कूलों के शिक्षकों ने न्यूनतम वेतन ने दिए जाने, ठेके पर अस्थायी रूप से काम करने की मजबूरी, अवकाश और अन्य सामाजिक सुविधाओं का न मिलना, आदि पर अपने-अपने अनुभव बताये।

कार्यक्रम का समापन करते हुए, मज़दूर एकता कमेटी की ओर से कामरेड संतोष कुमार ने ‘सम्मान से जीने लायक वेतन हमारा अधिकार!’ इस अभियान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

उन्होंने उपस्थित लोगों को आगामी 3 अक्तूबर, 2026 की शाम 5:30 बजे ओखला औद्योगिक क्षेत्र में मजदूर एकता कमेटी द्वारा आयोजित होने वाली मीटिंग में शामिल होने का बुलावा दिया, जिसका शीर्षक ‘सम्मान से जीने लायक वेतन हमारा अधिकार!’ है। इसी के साथ मीटिंग समाप्त हुई।

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