अतिरिक्त बोझ उठाने से लोको पायलटों का इंकार!

AILRSA से प्राप्त खबरों पर आधारित कामगार एकता कमिटी के संवाददाता की रिपोर्ट

30 सितम्बर को, मध्य रेलवे के लोको पायलटों ने, ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोशिएशन (AILRSA) के नेतृत्व में, मध्य रेलवे के कई स्टेशन लॉबियों के सामने ‘हल्ला बोल’ आंदोलन आयोजित कियाI उन्होंने जारी किए हुए निवेदन में कहा है कि:

1. लोको रनिंग स्टॉफ के ऊपर टेल लैंप ढोने का बोझ बढ़ाया गया है।

2. विस्फोटक पदार्थ डेटोनेटर को ढोने, रेल यात्रियों के बीच लेकर यात्रा करने, और विश्राम गृह में उसे लेकर आराम करने के लिए बाध्य किया जा रहा है। जिससे रेल यात्रियों और स्वयं कर्मचारी के जान जोखिम में हो सकते हैं, जबकि रेलवे एक्ट 1989 में इसे अपराध बताया गया है।

3. FSD जो कि एक लोको में लगाए जाने वाले डिवाइस है, उसे भी लोको रनिंग स्टॉफ के ऊपर ढोने की जिम्मेदारी दी गई है।

4. ये सभी हमारे सेवा शर्त के विरुद्ध है और हमारे मुख्य कार्य लोको ऑपरेशन और ट्रेन संचालन के कंसंट्रेशन को भंग करता है।

23.09.2026 को रेलवे बोर्ड द्वारा एक पत्र जारी किया गया, जिसमें कहा है कि ट्रेन मैनेजर के बिना चलनेवाली गाड़ी में टेल लैम्प ढ़ोने की जिम्मेदारी लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट की होगीI इसके विरोध में रनिंग स्टाफ ने कहा कि उनका मुख्य दायित्व ट्रेनों का सुरक्षित संचालन है, और उन पर एक अतिरिक्त गैर-मुख्य कर्तव्य थोपने से उनका कार्यभार बढेगा और उनका ध्यान भटकेगा, जो सुरक्षा के सिद्धांत के विरुद्ध हैI इसलिए सुरक्षा उपकरणों का अतिरिक्त शारीरिक बोझ डालना और सामान ढ़ोने की जिम्मेदारी देना उन्हें स्वीकार नहीं है।

AILRSA के पदाधिकारियोंने यह भी स्पष्ट किया कि एफएसडी (फ़ॉग सेफ डिवाइस), डेटोनेटर और अन्य सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। विरोध इन उपकरणों को लॉबी से इंजन तक ढ़ोने और उनका वजन उठाने से लेकर है। इसलिए वे मांग कर रहे है कि उपकरणों को इंजिन में उपलब्ध कराया जाय।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रनिंग स्टाफ पहले से ही रिक्तियों की वजह कर्मचारियों की कमी, अपर्याप्त विश्राम, अमानवीय कार्यभार और अनिश्चित ड्यूटी समय के दबाव से बेहद परेशान है। इसलिए उन पर अतिरिक्त शारीरिक बोझ देना उचित नहीं है।

यदि माँगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज होगा यह चेतावनी भी उन्होंने दी।

वार्तापत्रों के रिपोर्टों के अनुसार इस आंदोलन को CRMS, NRMU, RKS आदि रेल मजदूरों के दूसरे संगठनों ने भी समर्थन दिया।

8 अक्तूबर को मध्य रेलवे के सभी DRM ऑफिस पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की गई है।

मध्य रेलवे के साथ साथ दूसरे रेलवे के अन्य जोनों में भी यह आक्रोश बढ़ रहा है।

पहले से तनावग्रस्त लोको पायलटों का यह आंदोलन जायज है और सभी रेल कर्मचारी तथा यात्रियों ने उनका समर्थन करना चाहिए।

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