मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

आल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज़ फेडरेशन के आह्वान पर हिन्दू राव अस्पताल की नर्सें अपनी जायज़ मांगों को लेकर संघर्ष कर रही हैं। अस्पताल की सभी नर्सों ने 28 सितम्बर से काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जाहिर करना शुरू कर दिया। अब वे 5 से 11 अक्तूबर तक प्रतिदिन 2 घंटे सांकेतिक हड़ताल कर रही हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे 12 अक्तूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जायेंगी।
प्रदर्शनकारी नर्सों का कहना है कि अस्पताल में 300 नर्सों के स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 238 पद खाली हैं। लेकिन सरकार उन पदों पर स्थाई भर्ती नहीं कर रही है।
यह अस्पताल दिल्ली में नगर-निगम का सबसे बड़ा अस्पताल है। इसकी कुल क्षमता 980 बिस्तरों की है। 300 नर्सों का काम सिर्फ़ 62 नर्सें ही संभालती हैं, जिससे एक नर्स पर 40 से 50 मरीजों की देखभाल की ज़िम्मेदारी होती है। ऐसे में नर्सों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मरीजों की देखभाल ठीक से नहीं हो पाती है।
फेडरेशन ने कहा कि 122 नर्सिंग कर्मियों की सीनियर नर्सिंग ऑफिसर के पद पर पदोन्नति की गयी है, परन्तु इसके बावजूद उनको काम नहीं दिया जा रहा है। फेडरेशन ने उन्हें तत्काल उनके पदों पर काम सौंपने की मांग की है।
नर्सिंग फेडरेशन ने प्रशासन व दिल्ली नगर निगम को एक मांगपत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि 238 नर्सों के रिक्त पदों पर तुरंत नियमित सरकारी भर्ती की जाए, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार स्टाफिंग पैटर्न का पुनरीक्षण किया जाए, नर्सिंग व प्रशासनिक कार्यों में गैर-नर्सिंग अधिकारियों का हस्तक्षेप तुरंत बंद किया जाये तथा योग्य नर्सिंग कैडर को ही कमान सौंपी जाए।
