मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

11 अक्तूबर को मज़दूर एकता कमेटी ने ‘चुनाव प्रक्रिया पर जनता का नियंत्रण कैसे हो?’ विषय पर एक जनसभा आयोजित की।
देशभर में वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चल रहा है। इस पुनरीक्षण के दौरान करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं। इस प्रक्रिया के दौरान जिन लोगों के नाम काटे गये हैं, वे अपने वोट देने के अधिकार से वंचित हो रहे हैं। इसके ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलन चलाये जा रहे हैं। सभा का आयोजन इस संदर्भ में किया गया।
सभा को संबोधित करते हुये कामरेड बिरजू नायक ने कहा कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से या चुनाव आयुक्त के चयन में मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने से मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया की गंभीर समस्याओं का समाधान नहीं होगा। इससे पूंजीपति वर्ग की पार्टियों और उम्मीदवारों तथा मज़दूरों और किसानों की पार्टियों और उम्मीदवारों के बीच समान अवसर की कमी का समाधान नहीं होगा।
आज ऐसे मूलभूत परिवर्तन की ज़रूरत है, जिससे पूरी राजनीतिक व्यवस्था और चुनाव आयोग समेत पूरी राजनीतिक प्रक्रिया जनता के नियंत्रण में आ सके।
आज पूंजीवादी लोकतंत्र मौजूद है। इस व्यवस्था में सत्ता के सभी संस्थानों पर पूंजीपतियों का कंट्रोल है। हमें पूंजीवादी लोकतंत्र की जगह पर श्रमजीवी लोकतंत्र – जिसमें फ़ैसले लेने की शक्ति मज़दूरों और किसानों के हाथ में होगी – स्थापित करने के मक़सद के साथ संघर्ष करना होगा।
सभा का समापन संतोष कुमार ने किया।
