ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉयीज़ एसोसिएशन (AIBEA) की प्रेस विज्ञप्ति


प्रेस विज्ञप्ति: दिनांक: 15/10/2026
हम IDBI बैंक के निजीकरण और विदेशीकरण पर कैबिनेट के फैसले का विरोध करते हैं।
सरकार अपने निजीकरण के एजेंडे के तहत IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है। भारत सरकार और LIC मिलकर IDBI बैंक के 94% शेयरों को नियंत्रित करते हैं। भारी खराब ऋण के कारण, बैंक को पहले समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। अब बैंक अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और लगातार हर साल शानदार मुनाफा कमा रहा है।
संसद में आश्वासन: पहले जब IDBI का IDBI बैंक में विलय किया गया था, तब सरकार ने संसद को आश्वासन दिया था कि सरकार के पास हमेशा कम से कम 51% शेयर रहेंगे। लेकिन अब सरकार IDBI बैंक को बेचने की योजना बना रही है।
जनता की बचत: आज बैंक में कुल जमा राशि लगभग 3,50,000 करोड़ रुपये है। पिछले तीन वर्षों में बैंक ने क्रमशः 5600 करोड़ रुपये, 7500 करोड़ रुपये और 9500 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। इस तरह, एक अच्छा प्रदर्शन करने वाले बैंक को बेचा जा रहा है।
क्या यह ‘आत्मनिर्भर’ है? यह सिर्फ निजीकरण नहीं, बल्कि ‘विदेशीकरण’ है। कैबिनेट ने बैंक के 60% शेयर कनाडा की एक निवेशक कंपनी, फेयरफैक्स को बेचने का फैसला किया है। सरकार ‘आत्मनिर्भर’ होने की बात करती है, लेकिन आम जनता की भारी बचत वाला यह महत्वपूर्ण बैंक एक विदेशी निवेशक को बेचा जा रहा है।
रणनीति बैंक को बेचने की है: सरकार इसे ‘रणनीतिक पुनर्गठन‘ या ‘रणनीतिक विनिवेश‘ जैसे नाम दे सकती है, लेकिन असल में यह एक महत्वपूर्ण बैंक को किसी विदेशी निवेशक को बेचने के अलावा और कुछ नहीं है। यह लोगों की भारी-भरकम बचत (3,50,000 करोड़ रुपये) को किसी विदेशी निवेशक के हाथों में सौंपने के सिवा कुछ नहीं है। यह सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग को कमजोर करने के अलावा और कुछ नहीं है।
यह पूरी तरह से अनुचित और अवांछनीय है। हम इसका कड़ा विरोध करते हैं। हम सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हैं।
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सी.एच.वेंकटचलम
महासचिव
