पुणे में बिजली कर्मचारियों की बैठक में महाराष्ट्र सरकार द्वारा निजीकरण के कदमों का विरोध किया गया

कामगार एकता कमिटी (केईसी) संवाददाता की रिपोर्ट

24 जून को महाराष्ट्र के हजारों बिजली कर्मचारियों ने अपने कार्यस्थलों पर गेट मीटिंग की। हालांकि आंदोलन का मुख्य कारण लंबित वेतन समझौता है, लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कई स्थानों पर कर्मचारियों ने बिजली वितरण के निजीकरण की दिशा में महाराष्ट्र सरकार द्वारा उठाए जा रहे विभिन्न कदमों का भी एकजुट विरोध व्यक्त किया।

उदाहरण के लिए, पुणे में महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटि वर्कर्स फेडरेशन, सबऑर्डिनेट इंजीनियर्स एसीओसेशन, पॉवर सेक्टर टेक्निकल वर्कर्स यूनियन (यूनियन 1029), महाराष्ट्र राज्य वीज कामगार महासंघ, महाराष्ट्र स्टेट पॉवर वर्कर्स कांग्रेस (इंटक), महाराष्ट्र राज्य मगसवर्गीय विद्युत कर्मचारी संगठन के सैकड़ों कर्मचारी रास्ता पेठ कार्यालय के बाहर एकत्र हुए। लंबित आयु संशोधन के अलावा, उन्होंने 4 मांगें उठाईं, जो सभी बिजली वितरण के निजीकरण से जुड़ी थीं।

कॉमरेड भीमाशंकर पोहेकर, बाबासाहेब शिंदे, सुरेश जाधव, केदार रेलेकर, प्रशांत मालवाडे और संजय घोडके ने एकत्रित हुए कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने स्मार्ट मीटर योजना, महाराष्ट्र वितरण कंपनी के पुनर्गठन, मुख्य शहरों में बिजली वितरण को निजी फ्रेंचाइजी को सौंपने की योजना और समानांतर बिजली लाइसेंसिंग नीति के खिलाफ अपना एकजुट विरोध व्यक्त किया। स्मार्ट मीटर पर सैकड़ों पर्चे उत्साहपूर्वक वितरित किए गए। सभी उपस्थित लोगों ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा निजीकरण के सभी कदमों का विरोध करने का संकल्प व्यक्त किया। बिजली कर्मचारियों ने पूरे महाराष्ट्र में कई और गेट मीटिंग आयोजित करने की अपनी योजना की घोषणा की है।

Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments