कामगार एकता कमिटी संवाददाता की रिपोर्ट

महाराष्ट्र के सरकारी और अर्ध-सरकारी कर्मचारी, जिनमें शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी शामिल हैं, अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर 21 अप्रैल को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। इस हड़ताल का आह्वान ‘सरकारी, अर्ध-सरकारी, शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की समन्वय समिति’ ने किया था, जो लगभग 17 लाख कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करती है। सरकारी अस्पतालों की लगभग एक लाख नर्सों ने भी काम के दौरान काली पट्टियां बांधकर इस हड़ताल का समर्थन किया।
उनकी मुख्य मांग संशोधित राष्ट्रीय पेंशन योजना (RNPS) 2024 को लागू करने के बारे में थी। मार्च 2023 में, तत्कालीन मुख्यमंत्री ने पुरानी पेंशन योजना के मुद्दे पर विचार करने के लिए तीन सदस्यों वाली एक समिति नियुक्त की थी। 2024 में, महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की थी कि उसने RNPS को स्वीकार कर लिया है, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इस योजना के तहत, कर्मचारियों के पास अपनी अंतिम सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) के आधार पर 50 प्रतिशत पेंशन पाने का विकल्प होगा, और उनके पेंशन तथा DA का 60 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में मिलेगा। कर्मचारियों का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार इस योजना को लागू करने में देरी कर रही है, जिससे 1 मार्च 2024 के बाद रिटायर हुए कर्मचारियों को नुकसान हो रहा है।

उनकी अन्य महत्वपूर्ण मांगें थीं—सेवानिवृत्ति की आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष करना; उन सभी संविदा/दैनिक/अंशकालिक कर्मचारियों को नियमित करना जो पिछले 10 वर्षों से लगातार काम कर रहे हैं; चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की भर्ती पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाना; और कैशलेस स्वास्थ्य लाभों का विस्तार करना।
वे नई शिक्षा नीति पर पुनर्विचार भी चाहते थे।
कर्मचारियों ने 24 अप्रैल को काम पर तभी लौटे, जब मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल के सामने यह स्वीकार किया कि उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों पर शीघ्रता से विचार किया जाएगा।

