मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट
बिहार राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर 6 मई, 2026 को तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालयों के तहत 12 कालेजों और महाविद्यालयों के कार्यालयों में कर्मचारियों की दो दिवसीय कलमबंद हड़ताल हुयी।
बिहार के भागलपुर में स्थित सुंदरवती महिला महाविद्यालय में गैर-शैक्षणिक मज़दूरों ने अपनी लंबित व जायज़ मांगों को लेकर कालेज के परिसर पर धरना दिया। धरने में सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ़ नारे लगाते हुए, हड़ताली कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि लम्बे समय से मज़दूरों की समस्याओं को नज़र अंदाज किया जा रहा है। कई बार ज्ञापन देने और वार्ता करने के बावजूद भी, उनकी 15 सूत्रीय मांगों पर सरकार और प्रशासन द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
बिहार राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारी ने कहा कि यह लड़ाई केवल वेतन या सेवा शर्तों की नहीं, बल्कि मज़दूरों के सम्मान और अधिकारों की है। उनकी मुख्य मांग है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये आदेशों को लागू किया जाये। वेतन कटौती वापस लिया जाये, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को समय से पदोन्नति दिया जाये तथा एसीपी (सुनिश्चित करियर प्रगति) और एमएसीपी (संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति) का लाभ, मार्च 2026 के वेतन के साथ लागू किया जाये। नये कालेजों में पुराने कालेजों के मज़दूरों को ट्रांसफर न किया जाये। इससे मज़दूरों को पारिवारिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
महासंघ के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यह आंदोलन सिर्फ़ भागलपुर के कर्मचारियों का संघर्ष नहीं है बल्कि पूरे बिहार के विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों का सांझा संघर्ष है। उन्होंने घोषणा की कि आने वाली 20 मई को पूरे बिहार के विश्वविद्यालयों के कर्मचारी एकजुट होकर एक विशाल जुलूस निकालेंगे और अपनी मांगों को लेकर आंदोलन को तेज़ करेंगे।
