IDBI बैंक का निजीकरण फिर से शुरू किया जाएगा

कामगार एकता कमिटी संवाददाता की रिपोर्ट

केंद्र सरकार IDBI बैंक के कर्मचारियों और अधिकारियों के विरोध के बावजूद, वर्षों से इसके निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। बताया गया है कि मार्च 2026 में दो बोलीदाताओं—Fairfax Financial Holdings Ltd. और Emirates NBD—से वित्तीय बोलियाँ प्राप्त हुईं। चूँकि ये बोलियाँ सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मूल्य से कम थीं, इसलिए यह घोषणा की गई कि बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया रद्द कर दी गई है।

Fairfax Financial Holdings की स्थापना कनाडा के एक अनिवासी भारतीय (NRI) ने की थी, और इसने 2018 में CSB Bank (पहले Catholic Syrian Bank) का अधिग्रहण भी कर लिया था। Emirates NBD की योजना RBL Bank में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी 26,853 करोड़ रुपये में खरीदने की है, और उसे कुछ दिन पहले ही सरकार से इसकी मंज़ूरी मिल गई है। यह भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) है, और ऐसा पहली बार होगा जब कोई मुनाफ़ा कमाने वाला भारतीय बैंक किसी विदेशी संस्था की सहायक कंपनी बनेगा। Emirates NBD दुबई स्थित एक वित्तीय समूह है, और इसमें ज़्यादातर हिस्सेदारी दुबई सरकार की है।

अब यह खबर आई है कि IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया को नए सिरे से बोलियां आमंत्रित करके फिर से आगे बढ़ाया जाएगा। खरीदारों के लिए इसे और अधिक आकर्षक बनाने के लिए न्यूनतम कीमत में लगभग 20% की कटौती की जाएगी।

यह पहली बार नहीं है कि सरकार किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम को खरीदने के लिए पूंजीपतियों को और अधिक आकर्षित करने के उद्देश्य से उसकी न्यूनतम कीमत कम कर रही है। एयर इंडिया के मामले में भी ऐसा बार-बार किया गया, जब तक कि निजीकरण की शर्तें वैसी नहीं हो गईं, जैसी पूंजीपति चाहते थे। IDBI बैंक के मामले में भी ऐसा ही हो सकता है। मार्च 2026 के बाद से IDBI बैंक के शेयरों की कीमत में काफी गिरावट आई है। इस बात का इस्तेमाल न्यूनतम कीमत में और कमी की मांग करने के लिए एक और बहाने के तौर पर किया जाएगा।

IDBI ने 2025-26 में 9,500 करोड़ रुपये से ज़्यादा, 2024-25 में 7,500 करोड़ रुपये और 2023-24 में 5,600 करोड़ रुपये का मुनाफ़ा कमाया। इस तरह, पिछले तीन सालों में इसने 22,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का मुनाफ़ा कमाया है और यह मुनाफ़ा साल-दर-साल बढ़ता ही जा रहा है। इसके बावजूद, सरकार बैंक को बेचने के लिए तय की गई न्यूनतम कीमत को कम करने की योजना बना रही है।

IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर सरकार जिस तरह से आगे बढ़ रही है, उससे एक बार फिर यह साबित हो गया है कि निजीकरण मज़दूरों और उपभोक्ताओं की कीमत पर, पूँजीपतियों के फ़ायदे के लिए किया जाता है। वे ही यह तय करते हैं कि निजीकरण की शर्तें क्या होंगी और उन्हें किस रूप में स्वीकार किया जाएगा।

निजीकरण पूँजीपति वर्ग का एजेंडा है, और इसे हर उस पार्टी द्वारा लागू किया जाता है जिसे वे सत्ता में लाते हैं—चाहे वह राज्य स्तर पर हो या केंद्र स्तर पर। निजीकरण तथा वर्तमान सत्ताधारी वर्ग के अन्य मज़दूर-विरोधी और जन-विरोधी हमलों को रोकने के लिए, मज़दूरों को एक वर्ग के रूप में एकजुट होकर पूँजीपति वर्ग के शासन का विरोध करना होगा।

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