मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट
8 जून को मध्यप्रदेश के विदिशा में ‘मध्य प्रदेश अतिथि शिक्षक संगठन समिति’ के बैनर तले अतिथि शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। बड़ी संख्या में शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे और नियमितीकरण, 12 माह का कार्यकाल तथा नियमित शिक्षकों की भांति सुविधाएं प्रदान किए जाने की मांग उठाई।

शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों की ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं। उनसे नियमित शिक्षकों की तरह कार्य लिया जाता है, लेकिन उन्हें न तो स्थायित्व मिलता है और न ही अन्य सुविधाएं। उन्हें हर साल अप्रैल के अंत में कार्यमुक्त कर दिया जाता है और नए सत्र में फिर से नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होती है। इस स्थिति से उनके सामने आर्थिक और मानसिक संकट पैदा हो जाता है।
केवल विदिशा जिले में लगभग 3,400 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि पूरे प्रदेश में लगभग 70 हजार अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। वर्तमान में, 29 अप्रैल से अधिकांश अतिथि शिक्षक आंदोलन कर हैं, जबकि नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है। उन्होंने मांग की है कि अतिथि शिक्षकों का 12 माह का कार्यकाल सुनिश्चित किया जाए, अवकाश सहित अन्य सुविधाएं नियमित शिक्षकों के समान दी जाएं और बार-बार हटाने की प्रक्रिया समाप्त की जाए। उन्होंने यह भी चिंता जताई है कि कई अतिथि शिक्षक लंबे समय से सेवा दे रहे हैं और उनकी आयु बढ़ती जा रही है, ऐसे में नियमितीकरण नहीं होने पर उनका भविष्य संकट में पड़ सकता है।
आंदोलित शिक्षकों ने बताया कि अतिथि शिक्षक अपनी मांगों को लेकर कई बार शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं। पूर्व में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण की घोषणा की थी, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई ठोस आदेश जारी नहीं हुआ है। उन्होंने मांग की कि नए शैक्षणिक सत्र के साथ ही अतिथि शिक्षकों को पुनः विद्यालयों में पदस्थ किया जाए और उनकी प्रमुख मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए।
