बलिया में किसानों और मज़दूरों का प्रदर्शन

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में संयुक्त किसान मोर्चा और ट्रेड यूनियनों तथा मज़दूर संगठनों के सदस्यों ने किसानों और मज़दूरों की विभिन्न समस्याओं को लेकर 9 जून को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन तथा सभा की। इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा।

सभा को संबोधित करते हुये सहभागी संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि खाद, बीज, डीजल, पेट्रोल, सीएनजी और बिजली की बढ़ती क़ीमतों पर तुरंत रोक लगाई जाये। उन्होंने कहा कि श्रम क़ानूनों में बदलाव और मज़दूर-विरोधी नीतियों के कारण मज़दूर वर्ग भी संकट में है। सरकार और कंपनियां युद्ध का बहाना देकर उपभोक्ताओं को ठग रही हैं।

केन्द्र सरकार अमरीका के साथ मुक्त व्यापार समझौता करके, यहां के किसानों को गुलाम बनाने का काम कर रही है। यदि अनाज, कपास, दालें, दूध, मक्का आदि अमरीका से सस्ते में आएगा तो हिन्दोस्तान के किसानों की फ़सलों को कौन ख़रीदेगा? अमरीका के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने से किसान और किसानी के समाप्त होने का ख़तरा बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि तेल और रसोई गैस सिलेंडर की क़ीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे महंगाई तेज़ी से बढ़ रही है।

सहभागी संगठनों ने मांग की कि यूरिया, डीएपी, डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस और सीएनजी पहले की तरह प्रचूर मात्रा में पुराने दरों पर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि इनकी कालाबाजारी रोकी जा सके। किसानों के ट्रैक्टर के लिए डीजल की मात्रा सीमित न की जाए और उर्वरक या डीजल प्राप्त करने के लिए कृषि भूमि का कागज़ दिखाने को बाध्य न किया जाए। फ़सलों की ख़रीद के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार सी2+50 प्रतिशत के आधार पर एमएसपी क़ानून बनाया जाए। अनाज, कपास, सोयाबीन, मक्का, दूध आदि को बचाने तथा खेती व किसानों को संरक्षित करने के लिए आयात पर रोक लगाई जाए। उन्होंने गन्ना किसानों के बकाया का भुगतान करने की मांग की और बिजली के निजीकरण और स्मार्ट मीटर योजना को समाप्त करने की मांग की। उन्होंने मांग की कि घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाये और किसानों को मुफ्त बिजली दी जाये।

उन्होंने यह भी मांग की कि किसानों तथा श्रमिकों के सभी प्रकार के क़र्ज़ माफ़ किये जायें। मज़दूर-विरोधी चार श्रम संहिताओं को वापस लिया जाये, औद्योगिक क्षेत्र में न्यूनतम मज़दूरी 26,000 रुपये की जाये। मनरेगा को पुनः चालू किया जाये और उसमें काम के घंटे 200 किया जाये और मनरेगा में मज़दूरी 600 रुपये प्रतिदिन की जाये।

उन्होंने सरकार से भूमि अधिग्रहण क़ानून 2013 को लागू करने और बीज विधेयक 2025 को रद्द करने की मांग की। अन्य मांगें थीं आंधी-तूफान से हुई बर्बादी का मुआवजा, तथा गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल और आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,600 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाना।

किसानों ने इस चेतावनी के साथ सभा का समापन किया कि यदि सरकार हमारी मांगों को नहीं मानेगी तो आंदोलन को तेज़ किया जायेगा।

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