संयुक्त किसान मोर्चा और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने बिजली क्षेत्र के निजीकरण, लेबर कोड और किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन को अंतिम रूप देने के लिए 29 जुलाई को नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय सम्मेलन की योजना बनाई

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के चेयरमैन श्री शैलेंद्र दुबे का बयान

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के चेयरमैन श्री शैलेंद्र दुबे ने 6 जुलाई को कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर, 29 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में किसानों, श्रमिकों और कर्मचारियों का एक विशाल राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें देश भर से किसान संगठनों, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों, ट्रेड यूनियनों और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में भाग लेंगे।

श्री दुबे ने कहा कि सम्मेलन में किसानों, श्रमिकों, कर्मचारियों और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। एजेंडे में शामिल प्रमुख मुद्दों में प्रस्तावित बिजली (संशोधन) विधेयक, 2025 (जिसका उद्देश्य बिजली क्षेत्र के निजीकरण को बढ़ावा देना है), उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में बिजली वितरण कंपनियों का तेजी से होता निजीकरण, श्रमिकों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले चार लेबर कोड और प्रस्तावित बीज विधेयक शामिल हैं। उम्मीद है कि सम्मेलन एक साझा राष्ट्रीय रणनीति तैयार करेगा और इन नीतियों के खिलाफ व्यापक देशव्यापी आंदोलन के लिए रोडमैप तय करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान संगठनों और विभिन्न राज्यों से सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी संगठनों के हजारों प्रतिनिधि सम्मेलन में भाग लेंगे और निजीकरण, श्रमिक-विरोधी नीतियों और किसान-विरोधी उपायों के खिलाफ संयुक्त संघर्ष को मजबूत करेंगे।

श्री शैलेंद्र दुबे ने याद दिलाया कि 12 फरवरी 2026 को संयुक्त किसान मोर्चा, 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति (NCCOEEE) के संयुक्त आह्वान पर एक ऐतिहासिक देशव्यापी हड़ताल आयोजित की गई थी। दुर्भाग्य से, इतने बड़े पैमाने पर लामबंदी के बावजूद, सरकारों ने निजीकरण के पक्ष में नीतियां लागू करना जारी रखा है। इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बिजली क्षेत्र के निजीकरण की प्रक्रिया को और तेज कर दिया गया है, जिससे देश भर के बिजली कर्मचारियों में व्यापक नाराजगी है। उन्होंने कहा कि अगर 29 जुलाई को होने वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस में बिजली सेक्टर के निजीकरण, मज़दूर-विरोधी नीतियों और किसान-विरोधी कानूनों के ख़िलाफ़ देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का फ़ैसला लिया जाता है, तो देश भर के बिजली इंजीनियर और कर्मचारी पूरी प्रतिबद्धता और एकता के साथ इसमें शामिल होंगे।

श्री शैलेंद्र दुबे ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारी पिछले 586 दिनों से बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन चला रहे हैं। इस दौरान, हज़ारों कर्मचारियों को उत्पीड़न, दंडात्मक कार्रवाई और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है, जिससे कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस तरह के दमनकारी उपाय बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की एकजुट आवाज़ को नहीं दबा सकते, जो सार्वजनिक बिजली क्षेत्र और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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