मध्य प्रदेश स्थित भोपाल में 1200 एमबीबीएस इंटर्न और भावी इंटर्न की अनिश्चितकालीन हड़ताल! सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में सम्मानजनक स्टाइपेंड व्यवस्था लागू की जाए।

कामगार एकता कमिटी (KEC) संवाददाता की रिपोर्ट

23 जुलाई को करीब 1200 एमबीबीएस इंटर्न और भावी इंटर्न ने भोपाल में हमीदिया अस्पताल से कलेक्ट्रेट तक पदयात्रा निकालकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपास्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पूरी नहीं होने पर शुक्रवार दोपहर 2 बजे से इंटर्न्स ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस इंटर्न हड़ताल पर हैंचिकित्सीय कार्य का बहिष्कार कर रहे इंटर्न्स ने शनिवार को अस्पताल परिसर में जमकर नारे बाजी की और अपनी मांगे रखीभोपाल और सागर जैसी जगहों पर शांतिपूर्ण बाइक रैलियां और प्रदर्शन आयोजित किए गएइंटर्न्स का कहना है कि मध्य प्रदेश में उन्हें इंटर्नशिप के दौरान केवल 14,337 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता है, ऐसे में स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार प्रतिमाह किया जाना चाहिएउनका दावा है कि स्टाइपेंड के मामले में मध्य प्रदेश देश में 25वें स्थान पर है, जबकि मेडिकल शिक्षा की फीस सबसे अधिक राज्यों में पांचवें स्थान पर है दिल्ली में 30 हजार रुपये, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में 44 हजार रुपये तक स्टाइपेंड दिया जा रहा है

आंदोलनकारियों ने कहा कि मध्य प्रदेश के इंटर्न भी अन्य राज्यों के इंटर्न की तरह समान जिम्मेदारी निभाते हैं और वही परीक्षाएं पास करके यहां तक पहुंचे हैं, इसलिए उन्हें भी सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना चाहिए

पिछले एक महीने से इंटर्न्स शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक अपनी बात पहुंचा रहे हैंइस दौरान चिकित्सा शिक्षा विभाग, वित्त विभाग, मुख्यमंत्री कार्यालय और जनप्रतिनिधियों को कई बार ज्ञापन सौंपे गए आश्वासन तो मिला, लेकिन अब तक कोई लिखित भरोसा नहीं दिया गयाउनका कहना है कि जब तक सरकार लिखित रूप से स्टाइपेंड बढ़ाने का निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगाइंटर्न्स का कहना है कि यदि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर लिखित आश्वासन देती है, तो आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा

क्या है प्रमुख मांग?

  • वर्तमान 14,337 रुपये प्रतिमाह इंटर्नशिप स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए
  • अप्रैल 2025 से लंबित संशोधनों को लागूरें
  • प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में समान और सम्मानजनक स्टाइपेंड व्यवस्था लागू की जाए

कामगार एकता कमिटी भावी डॉक्टरों के इस संघर्ष का समर्थन करती है | कई वर्षों की दिन रात मेहनत और ढेरों पैसे खर्च करने के बाद युवा डॉक्टर की डिग्री तो हासिल कर रहे हैं परन्तु संघर्ष यही समाप्त नहीं होता| इंटर्न पेशेवर डॉक्टर के मार्गदर्शन में बहुत बड़ी जिम्मेदारी निभाते हैं| KEC ने पाया है कि बुनियादी संसाधन के अभाव और जान बूझ करभरे जाने वाली रिक्तियों के कारण डॉक्टर काम के बोझ, नींद का अभाव, तनाव इत्यादि से ग्रसित होते हैं और उसमे भी इंटर्न्स ही ज्यादा शोषण के शिकार बनते हैं| यह बहुत ही चिंताजनक है कि समाज की श्रमशक्ति के सेहत का ख्याल रखने वाले डॉक्टर अपने ही स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रख पा रहे हैं| बहुत ही बुनियादी जरूरतों के लिए उन्हें हड़ताल पर जाना पड़ा है|

वर्तमान व्यवस्था को मुनाफों से विमुख कर सर्व सामान्य हितों की ओर अग्रसर करना होगा और यह सिर्फ मजदूरों के राज्य में ही मुमकिन हो सकता है|

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