ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन (AISMA) की अपने सदस्यों को आह्वान
जुलाई माह में आगरा कैंट के डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट पर ड्यूटी के दौरान रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के कुछ कर्मियों द्वारा हमला किया गया। AISMA ने आगरा में मंडल रेल प्रबंधक के कार्यालय के सामने अपने सैकड़ों सदस्यों की भागीदारी के साथ एक विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया, तथा दोषी कर्मियों को कड़ी से कड़ी सज़ा देने की मांग करते हुए पूरे भारत में धरना-प्रदर्शन किए। उनके लगातार विरोध के कारण रेलवे प्रशासन दोषियों के विरुद्ध कुछ कार्रवाई करने के लिए मजबूर हुआ है। AISMA ने रेलवे बोर्ड से मांग की है कि इस संबंध में जल्द से जल्द सख्त और स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएँ, ताकि ड्यूटी पर तैनात किसी भी रेलवे कर्मचारी के साथ ऐसी घटना दोबारा कभी न हो।
AISMA ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों की पूर्ति के लिए 11 अगस्त को महाप्रबंधक कार्यालयों के सामने धरना देकर “पावर डे” मनाने का निर्णय लिया है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
1) शून्य रिक्तियाँ
2) रात्रि ड्यूटी भत्ता बिना किसी अधिकतम सीमा के सभी को दिया जाए
3) अमानवीय 12 घंटे की ड्यूटी रोस्टर व्यवस्था समाप्त की जाए
4) IRT और IDT में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए तथा समयबद्ध स्थानांतरण किए जाएँ

AISMA के महासचिव का आह्वान
प्रिय साथियों,
15 जून को हमने स्टेशनों पर काले बैज बांधकर अपनी चार प्रमुख मांगों को लेकर ड्यूटी की जो निम्न हैं:
(1) जीरो वैकेंसी,
(2) नाइट ड्यूटी अलाउंस सभी को बिना किसी सीलिंग लिमिट के दिया जाए,
(3) 12 घंटे का अमानवीय रोस्टर समाप्त किया जाए,
(4) IRT एवं IDT में पारदर्शिता के साथ शीघ्र स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाए।
15 जून के शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन का परिणाम यह रहा कि 17 जून को CRB महोदय ने सभी रेलवे अधिकारियों के साथ बैठक की तथा 18 जून को माननीय रेल मंत्री महोदय ने रेलवे बोर्ड के सभी अधिकारियों के साथ बैठक कर स्टेशन मास्टर्स को सशक्त (Empower) करने के संबंध में सुझाव मांगे। 22 जुलाई को IRT एवं IDT के संबंध में रेलवे बोर्ड द्वारा E (NG)-I/2026/TR/15 (E-FILE:3537162) पत्र जारी कर दिया गया है। इस हेतु हम उनका आभार व्यक्त करते हैं ।
14 जुलाई को हमने सभी DRM कार्यालयों में पुनः शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। आगरा में हमारे एक स्टेशन मास्टर साथी के साथ RPF के कुछ दोषी कर्मियों द्वारा किए गए जघन्य, अमानवीय एवं अकल्पनीय कृत्य के विरोध में आगरा प्लेटफॉर्म तथा मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय पर विशाल प्रदर्शन किया गया। साथ ही भारतीय रेलवे के सभी मंडलों एवं स्टेशनों पर भी धरना-प्रदर्शन किए गए। सभी स्टेशनों पर कैंडल मार्च निकाले गए और हम लगातार काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारा यह आंदोलन किसी एक विभाग के विरुद्ध नहीं है। हमारा विरोध उन दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध है जिन्होंने अपने घोर आपराधिक एवं अमानवीय कृत्य से न केवल भारतीय रेलवे की गरिमा और विश्वसनीयता को तार-तार किया है, बल्कि पूरे रेल सुरक्षा बल विभाग की विश्वसनीयता, प्रतिष्ठा और छवि को भी गहरा आघात पहुँचाया है।
ड्यूटी पर तैनात एक स्टेशन मास्टर के साथ जिस प्रकार की हैवानियत की गई, उसकी निंदा के लिए शब्द नहीं हैं। स्टेशन मास्टर भारतीय रेलवे का वह चेहरा है, जिस पर देश का प्रत्येक नागरिक और प्रत्येक रेल यात्री भरोसा करता है। किसी भी संकट, दुर्घटना या परेशानी की स्थिति में यात्री सबसे पहले स्टेशन मास्टर की ओर आशा भरी नज़रों से देखता है, क्योंकि उसे विश्वास होता है कि रेलवे स्टेशन पर एक ऐसा अधिकारी उपस्थित है जो हर संभव सहायता के लिए सदैव तत्पर रहेगा। ऐसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी पर हमला करके दोषियों ने एक कर्मचारी मात्र पर नहीं, बल्कि पूरे रेलवे तंत्र, उसकी गरिमा और देशवासियों के विश्वास पर आघात किया है। दोषियों द्वारा यह संदेश देने का निंदनीय प्रयास किया गया कि वे लोग कानून और व्यवस्था से भी ताक़तवर हैं जिसने पूरे रेल यात्रियों और कर्मचारियों के बीच भय का वातावरण पैदा कर दिया है, रेल हित में इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हमारा यह संघर्ष केवल दोषियों को कठोरतम दंड दिलाने के साथ ही रेलवे में ऐसी किसी भी गलत प्रवृत्ति या परिपाटी को प्रारंभिक अवस्था में ही समाप्त करवाने के लिए भी है। हम चाहते हैं कि रेलवे बोर्ड इस संबंध में शीघ्र कठोर एवं स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, जिससे भविष्य में किसी भी ड्यूटी पर तैनात रेलवे कर्मचारी के साथ ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो और पूरे रेलवे तंत्र में कानून, अनुशासन, पारस्परिक सम्मान एवं जवाबदेही की संस्कृति और अधिक सुदृढ़ हो।
आगरा प्रकरण की जांच समिति अपनी जांच कर रही है। हमारी एकता , सभी विभागों के कर्मचारियों के सहयोग एवं जन विरोध के फलस्वरूप:
1. Sr. DSC का स्थानांतरण कर दिया गया है।
2. चारों दोषी कांस्टेबलों को निलंबित कर अन्य डिवीजनों में स्थानांतरित किया गया है।
3. चारों आरपीएफ कांस्टेबलों के साथ जो तीन टेंपो चालक थे, उन्हें जीआरपी ने गिरफ्तार कर लिया है और उन पर कार्यवाही की जा रही है।
4. DIG/Coordination/RB ने सभी जोनल रेलवेज़ को राज्यसभा के एक प्रश्न (संदर्भ: 2026/SEC (Crime)/110/29 दिनांक 21 जुलाई 2026) के संबंध में पत्र जारी किया है, जो एक प्रोविजनली एडमिटेड स्टार्ड प्रश्न (DY No. S5155) से संबंधित है। यह प्रश्न पिछले तीन वर्षों में RPF के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों से संबंधित है तथा खराब प्रदर्शन के आँकड़ों को मांगने के साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या रेलवे इस कार्य को CISF को सौंपने पर विचार कर रहा है।
हालांकि, हम इसे अपनी पूर्ण विजय नहीं मानते। जिस प्रकार इस घटना ने रेलवे की छवि को आम जनता के बीच भी शर्मसार किया है, ऐसे जघन्य कृत्य करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलने तक हम नहीं रुकेंगे। हमें पूर्ण न्याय चाहिए और हम उसे प्राप्त करके रहेंगे।
अब हमें अपनी शेष लंबित मांगों पर ध्यान केंद्रित करते हुए 11 अगस्त को महाप्रबंधक कार्यालय पर “पावर डे” मनाते हुए शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करना है। आप सभी से अनुरोध है कि इसके लिए पूर्ण तैयारी करें।
आइए, हम यह संदेश पूरे देश तक पहुँचाएँ कि हमारा आंदोलन न्याय, गरिमा, कानून के शासन, रेलवे की प्रतिष्ठा तथा प्रत्येक ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी की सुरक्षा के लिए है।
धन्यवाद
महासचिव-AISMA
