रेलवे बोर्ड को ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन (AISMA), ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिल (AIGC), ऑल इंडिया रेलवे ट्रैक मेंटेनर यूनियन (AIRTU), ऑल इंडिया पॉइंट्समैन एसोसिएशन (AIPMA), रेलवे प्रवासी सुरक्षा संघर्ष समिति और कामगार एकता कमिटी (KEC) का संयुक्त पत्र

पिछले कुछ सालों में, माल और यात्रियों, दोनों के आवागमन में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। दूसरी ओर, खाली पदों की संख्या 2015 में 1.4 लाख से बढ़कर जून 2023 तक 2.74 लाख हो गई है। स्थिति को और बदत्तर करते हुए, रेलवे प्रशासन ने 2026-27 में 29,600 पदों को खत्म करने (सरेंडर करने) का लक्ष्य रखा है। इसका नतीजा यह है कि रेलवे कर्मचारियों पर तनाव और काम का बोझ असहनीय हो गया है। भर्ती प्रक्रिया इतनी धीमी है कि खाली पदों की संख्या कम होने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है। रेलवे मज़दूरों के संगठन सालों से सभी खाली पदों को तुरंत भरने और बढ़े हुए ट्रैफिक के कारण हर श्रेणी में पदों की ज़रूरत का फिर से मूल्यांकन करने की मांग कर रहे हैं। कामगार एकता कमिटी ने इन मांगों के बारे में रेलवे प्रसाशन को एक संयुक्त ज्ञापन भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसका स्वागत किया गया। संयुक्त ज्ञापन नीचे दिया गया है।
(अंग्रेजी पत्र का अनुवाद)

29 जून 2026
प्रति,
चेयरमैन और सीईओ,
रेलवे बोर्ड,
रेल भवन, रायसीना रोड,
नई दिल्ली 110001
विषय: (1) पद सरेंडर करने से संबंधित परिपत्र वापस लेना
(2) ट्रेन ट्रैफ़िक आदि में भारी बढ़ोतरी को देखते हुए, पदों की वास्तविक संख्या की कैडर-वार समीक्षा।
(3) भारतीय रेलवे के विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को शीघ्र भरना
आदरणीय महोदय / महोदया,
पिछले 11 सालों में, माल और यात्रियों, दोनों के लिए रेलवे ट्रैफिक में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। ट्रेनों की औसत रफ़्तार भी बढ़ी है। बोगियों/वैगनों की संख्या बढ़ने से रेक की लंबाई भी बढ़ गई है। रेलवे स्टेशनों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। इसका मतलब है कि ज़रूरी मनुष्यबल का फिर से आकलन करने और उसी के अनुसार अलग-अलग विभागों में मंज़ूर किए गए पदों की संख्या बढ़ाने की तत्काल ज़रूरत है।
परंतु, रेलवे बोर्ड अलग-अलग ज़ोन से हज़ारों पद सरेंडर करने के लिए कहकर ठीक इसके उलट काम कर रहा है। हाल ही में, ऐसी खबरें आई हैं कि देश भर के अलग-अलग ज़ोन से 29,600 पद सरेंडर करने के लिए कहा गया है।
हम आपका ध्यान 27 मार्च 2026 को राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में रेल मंत्री द्वारा दिए गए उत्तर की ओर दिलाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि 2014-15 और 2024-25 के बीच, IR ने 5.08 लाख मज़दूरों की भर्ती की। इसका मतलब है कि 11 वर्षों में औसतन प्रति वर्ष केवल 46,000 मज़दूरों की भर्ती हुई। हर साल सेवानिवृत होने वाले भारतीय रेलवे मज़दूरों की संख्या लगभग इतनी ही है। जून 2023 में एक RTI सवाल के जवाब में भारतीय रेलवे द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नॉन-गजेटेड खाली पदों की संख्या, जो 2015 में 1.4 लाख थी, 1 जून 2023 तक बढ़कर 2.74 लाख हो गई। सुरक्षा श्रेणी में, खाली पदों की संख्या 1.78 लाख तक थी!
हालात ऐसे हो गए हैं कि रेलवे मज़दूरों पर काम का बोझ बहुत बढ़ गया है, जिसके नतीजे ये हैं:
- कई मामलों में मज़दूरों को लगातार 12 घंटे से ज़्यादा काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है,
- बहुत बड़ी संख्या में रेलवे मज़दूरों को साप्ताहिक छुट्टी और ज़रूरी आराम का समय नहीं मिल पाता,
- रेलवे मज़दूरों पर बहुत ज़्यादा तनाव होता है, जिससे न सिर्फ़ उनकी अपनी सुरक्षा और सेहत पर असर पड़ता है, बल्कि करोड़ों रेल यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है।
हम भारतीय रेलवे की भर्ती प्रक्रिया से पूरी तरह वाकिफ़ हैं। लेकिन हमें लगता है कि जिस रफ़्तार से यह प्रक्रिया चल रही है, उसे काफ़ी तेज़ करने की ज़रूरत है। इस सिलसिले में, हम आपका ध्यान 27 मार्च 2026 को राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में रेल मंत्री द्वारा दिए गए उत्तर की ओर फिर से दिलाना चाहते हैं। उस जवाब के मुताबिक़, रेल मंत्रालय ने ग्रुप ‘C’ पदों की अलग-अलग श्रेणी में भर्ती के लिए 2024 से सालाना कैलेंडर जारी करने का सिस्टम शुरू किया है। नीचे दी गई सारिणी में नॉन-गजेटेड कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया की धीमी प्रगति दिखाई गई है, जिसमें 1,43,086 खाली पद हैं:
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कैलेंडर के अनुसार भर्ती की जाएगी। |
पहला स्टेज / सिंगल स्टेज कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) पूरा हुआ |
अब तक के लिए पैनल फाइनल हो चुके हैं |
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2024 |
92116 |
92116 |
43000 |
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2025 |
50970 |
19595 |
Nil |
साफ़ तौर पर, भर्ती की प्रक्रिया बहुत धीमी गति से चल रही है। इसलिए, हम निम्नलिखित फ़ेडरेशन/यूनियन/एसोसिएशन/संगठन यह मांग करते हैं:
- पदों को सरेंडर करने (खत्म करने) पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- भारतीय रेलवे के सभी विभागों में खाली पदों को तुरंत भरा जाए और किसी भी विभाग में ठेका/कॉन्ट्रैक्ट या आउटसोर्सिंग की इजाज़त न दी जाए।
- भर्ती प्रक्रिया में तेज़ी लाई जाए।
- ट्रैफ़िक में भारी बढ़ोतरी को देखते हुए, हर ज़ोन में हर श्रेणी के लिए ज़रूरी मनुष्यबल की कैडर-वार समीक्षा की जानी चाहिए। भारतीय रेलवे के लगातार विस्तार और बढ़ोतरी की वजह से मौजूदा और भविष्य की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए, ज़रूरी मनुष्यबल का आकलन करने के मौजूदा पैमाने (यार्डस्टिक) में बदलाव और उसे अपडेट किया जाना चाहिए।
आपके सकारात्मक उत्तर की प्रतीक्षा है।
सादर,

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शरदचंद्र पुरोहित |
(डी. बिस्वास) |
नरेंद्र पांचाल |
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महासचिव |
जनरल सेक्रेटरी |
राष्ट्रीय महासचिव |
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AISMA |
ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिल |
ऑल इंडिया रेलवे ट्रैक |
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मोबाइल नंबर: 7987051544 |
मेंटेनर यूनियन (A.I.R.T.U) |
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ईमेल:debajitbiswas267@gmail.com |
(पंजीकरण संख्या – G-6597) |

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मनोज कुमार गोस्वामी |
गिरीश |
प्रथमेश उपारकर |
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केंद्रीय महासचिव |
संयुक्त सचिव |
संयोजक |
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ऑल इंडिया पॉइंट्समैन एसोसिएशन (AIPMA) |
कामगार एकता समिति |
रेलवे प्रवासी सुरक्षा |
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मनोज कुमार गोस्वामी |
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संघर्ष समिति |
