इटली के रेल कर्मचारी निजीकरण और काम की खराब स्थितियों के विरोध में हड़ताल पर गए

कामगार एकता कमिटी के संवाददाता की रिपोर्ट

इटली में रेल कर्मचारियों ने 7 सितंबर को 24 घंटे की देशव्यापी हड़ताल की, जिससे हाई-स्पीड, लंबी दूरी और क्षेत्रीय ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं।

ट्रेन ड्राइवरों और ऑनबोर्ड कर्मचारियों की नेशनल असेंबली, CUB Trasporti, SGB और CAT यूनियनों के सदस्य काम की बिगड़ती स्थितियों और निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। वे महंगाई के हिसाब से वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। वे बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षा उपाय, काम के घंटे कम करने, अप्रेंटिस और नाइट-शिफ्ट में काम करने वालों के लिए सुरक्षा, आउटसोर्सिंग खत्म करने और रिटायरमेंट की उम्र कम करने की भी मांग कर रहे हैं।

यह हड़ताल 26 जुलाई को हुई पिछली हड़ताल के बाद हुई है और यह इटली भर में चल रहे औद्योगिक विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा है, जिसमें कर्मचारी घटती वास्तविक मजदूरी, बिगड़ती स्थितियों और सरकार समर्थित पुनर्गठन का विरोध कर रहे हैं।

हाल ही में हड़तालों में जो तेज़ी आई है, उसकी वजह कई ऐसे मुद्दे हैं जो कर्मचारियों को प्रभावित कर रहे हैं और ये मुद्दे भारतीय रेल कर्मचारियों की समस्याओं जैसे ही हैं:

  • काम का भारी बोझ और कर्मचारियों की कमी: भर्ती प्रक्रिया ठीक न होने के कारण काम का शेड्यूल बहुत सख़्त हो गया है, कर्मचारियों पर बहुत ज़्यादा दबाव है और आराम करने का समय बहुत कम मिल रहा है।
  • काम की जगह पर सुरक्षा और जानलेवा हादसे: 2023 के ब्रैंडिज़ो (Brandizzo) हादसे जैसी दुखद घटनाओं के बाद सुरक्षा एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा बन गया है; इस हादसे में तेज़ रफ़्तार ट्रेन की चपेट में आने से ट्रैक की देखरेख करने वाले पाँच कर्मचारियों की मौत हो गई थी यूनियनें अक्सर आरोप लगाती हैं कि कामकाज की रफ़्तार बढ़ाने और कॉर्पोरेट लागत कम करने के लिए सुरक्षा नियमों में ढील दी जा रही है।
  • रुकी हुई सैलरी बनाम बढ़ती महंगाई: कर्मचारी राष्ट्रीय सामूहिक श्रम समझौतों (Contratto Collettivo Nazionale di Lavoro) को नए सिरे से लागू करने की मांग कर रहे हैं ताकि महामारी के बाद की महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के हिसाब से उनका वेतन बढ़ाया जा सके।
  • निजीकरण औरस्पेज़ैटिनो” (Spezzatino) का विरोध: यूनियनें राष्ट्रीय इंटरसिटी रेल सेवा को स्थानीय सेवाओं में बांटने (जिसे “स्पेज़ैटिनो” कहा जाता है) का ज़ोरदार विरोध करती हैं। उनका तर्क है कि निजी ठेकेदारों को ज़्यादा काम सौंपने (आउटसोर्सिंग) से कर्मचारियों की राष्ट्रीय एकजुटता टूटती है और उन्हें मिलने वाले फ़ायदे खत्म हो जाते हैं।
  • कर्मचारियों और यात्रियों की सुरक्षा: यात्रा के दौरान मारपीट और ज़ुबानी बदसलूकी की घटनाओं में बढ़ोतरी के बाद, ट्रेन और स्टेशन पर काम करने वाले कर्मचारी ज़्यादा कड़े सुरक्षा इंतज़ाम और बेहतर सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
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