मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के 32,000 से अधिक कर्मचारी 15 सितम्बर से हड़ताल पर हैं। इनमें लगभग 10,000 ड्राईवर, 20,000 कंडक्टर व अन्य कर्मचारी हैं, जो निजी कंपनियों के ठेकेदारों के द्वारा नियुक्त किये गये हैं। ये कर्मचारी डीटीसी की इलेक्ट्रिक और क्लस्टर बसों का संचालन करते हैं। डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन ने इस हड़ताल को अगुवाई दी है।
आंदोलित कर्मचारी अपने दैनिक वेतन में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। वे मांग कर रहे हैं कि यह दैनिक 862 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये किया जाये। इसके साथ-साथ, वे ईएसआई और स्वास्थ्य बीमा व चिकित्सा सुविधाओं, दुर्घटना बीमा, साप्ताहिक अवकाश, भुगतान सहित छुट्टी, त्योहार-बोनस, ओवरटाइम, आदि की मांग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी मांग उठाई है कि दुर्घटना या गाड़ी के नुकसान की स्थिति में ड्राइवरों की बेसिक सैलरी से दंडात्मक कटौती न की जाये तथा ठेके पर रखे गए सभी कर्मचारियों को नियमित करके डीटीसी में समायोजित किया जाये।
मज़दूर एकता कमेटी डीटीसी के संघर्षरत कर्मचारियों का पूरा-पूरा समर्थन करती है और उनके संघर्ष में उनके साथ खड़ी है।
कर्मचारी हड़ताल पर क्यों उतरे?
बुराड़ी, नंगलोई, खानपुर, जीटीके, नेहरू प्लेस, शादीपुर, समेत कई प्रमुख डिपो में हड़ताली कर्मचारियों के साथ मज़दूर एकता कमेटी के कार्यकर्ताओं की बातचीत के दौरान, कर्मचारियों ने बताया कि इस महंगाई के दौर में इतने कम पैसों में परिवार का गुज़ारा करना, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य का खर्च उठाना उनके लिए बेहद मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा, उनसे बिना छुट्टी के लगातार काम करवाया जाता है, जिसके कारण उन्हें मानसिक तनाव झेलना पड़ता है। बस में छोटी-मोटी टूट-फूट होने पर उनकी सैलरी से ही पैसे काट लिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार ने हड़ताल की अगुवाई कर रहे ड्राइवरों की आईडी ब्लॉक कर दी है।
हड़ताली कर्मचारियों के अनुसार, इन सारी समस्याओं को लेकर, इससे पहले सरकार के साथ उनकी कई वार्ताएं हुयी थीं, लेकिन वेतन वृद्धि और अन्य मांगों पर सरकार से कोई ठोस लिखित आश्वासन न प्राप्त होने पर, उन्हें हड़ताल पर जाने को मजबूर होना पड़ा।
बस परिवहन व्यवस्था में बढ़ती ठेकेदारी
डीटीसी एक सरकारी संस्था है। उसने इलेक्ट्रिक बसों व क्लस्टर बसों के रख-रखाव तथा संचालन के काम को कुछ पूंजीवादी ऑटोमोबाइल कंपनियों को ‘मुख्य ठेकेदार’ बतौर सौंप रखा है।
मुख्य ठेकेदारों में एक जेबीएम ऑटो लिमिटेड है, जिसे दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक बस फ्लीट की मैन्युफैक्चरिंग, ऑपरेशन और मेंटेनेंस का काम सौंपा गया है। दूसरा बड़ा मुख्य ठेकेदार टाटा मोटर्स है जो क्लस्टर और इलेक्ट्रिक लो-फ्लोर बसों का संचालन करता है। इलेक्ट्रिक बसों की आपूर्ति और संचालन करने वाला एक अन्य ठेकेदार कंपनी पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी है। इसके अलावा एंटनी गैराज, प्रसन्न पर्पल, एबी ग्रेन स्पिरिट्स और शशि ट्रेवल्स जैसी कई अन्य ठेकेदार कंपनियां हैं, जिन्होंने विभिन्न रूटो के संचालन का मुख्य ठेका लिया हुआ है।
मुख्य ठेकेदार ड्राइवरों और कंडक्टरों की सीधी भर्ती नहीं करती है। इन्हें ठेके पर भर्ती करने का काम तीसरी पार्टी (उप-ठेकेदारों) को सौंपा गया है। ये उप-ठेकेदार ड्राइवरों को दैनिक वेतन या मासिक कॉन्ट्रैक्ट पर रखते हैं। इन उप-ठेकेदारों में टीमलीज सर्विसेज, इन्नोसॉर्स, जीएल स्टाफिंग और एसआईएस इंडिया लिमिटेड जैसे कुछ प्रमुख नाम हैं। ये उप-ठेकेदार उनके पीएफ और वेतन में से अपना कमीशन काटते हैं।
डीटीसी जो मुख्य नियोक्ता है और जिसकी ज़िम्मेदारी दिल्ली-एनसीआर की जनता को सार्वजनिक बस परिवहन सेवाएं प्रदान करना है, अपनी परिवहन सेवाओं को चलाने वाले इन संविदा कर्मचारियों के उचित वेतन व काम के हालातों को सुनिश्चित करने के अपने दायित्व से बड़े आपराधिक रूप से पीछे हट रही है।
ट्रेड यूनियनों और मज़दूर संगठनों ने डीटीसी के हड़ताली कर्मियों का समर्थन किया

21 सितंबर को हरिनगर बस डिपो पर, हड़ताल के समर्थन में दिल्ली संयुक्त ट्रेड यूनियनों ने ज़ोरदार संयुक्त प्रदर्शन किया और दिल्ली के श्रम मंत्री को ज्ञापन दिया। मज़दूर एकता कमेटी की ओर से प्रदर्शन को संतोष कुमार ने संबोधित किया। संघर्षरत डीटीसी कर्मचारियों का समर्थन करते हुए, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि डीटीसी प्रबंधन मज़दूरों को अपने अधिकारों से वंचित कर रहा है और श्रम क़ानूनों का सरेआम उल्लंघन कर रहा है। जनता को सार्वजनिक परिवहन सेवा मुहैया कराना सरकार की ज़िम्मेदारी है, और उसे कर्मचारियों की जायज़ मांगों को फ़ौरन पूरा करना चाहिए।
