मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

हरियाणा के फरीदाबाद स्थित ईएसआईसी अस्पताल में कार्यरत सैकड़ों डाक्टर (पीजी रेसिडेंट्स, सीनियर रेसिडेंट्स, जूनियर रेसिडेंट्स और इंटर्न) 36 घंटे की हड़ताल पर रहे। यह हड़ताल 21 सितंबर की सुबह शुरू हुई और 22 सितंबर की दोपहर तक चली, जब तक कि प्रबंधन ने डाक्टरों की मांगें मानने पर सहमति प्रकट नहीं की।
डाक्टरों को हड़ताल पर जाने के लिए तब बाध्य होना पड़ा जब 19 सितंबर को जनरल सर्जरी के एक पीजी रेसिडेंट की 40 घंटे की लगातार ड्यूटी के बाद ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी के दौरान अचानक तबीयत खराब हो गई। उस वक्त अस्पताल में जरूरी इलाज की बुनियादी सुविधाएं, एम्बुलेंस और विशेषज्ञ डाक्टर उपलब्ध नहीं थे। अंततः गंभीर रूप से बीमार डाक्टर को फरीदाबाद के निजी अमृता अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज करवाना पड़ा।
डाक्टरों ने बताया कि उन्हें लगातार 35 से 40 घंटे काम करना पड़ता है। घटना के दिन अस्पताल प्रबंधन समय पर एम्बुलेंस, नर्सिंग स्टाफ और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं (जैसे सर्वाइकल हार्ड कॉलर और समय पर एमआरआई) उपलब्ध कराने में विफल रहा।
प्रशासन के रवैये पर नाराज़गी जताते हुए डाक्टरों ने कहा कि कार्यस्थल पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है और काम करने की स्थिति बेहद खराब है। वे प्रशासन से गरिमापूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार की उम्मीद करते हैं। संसाधनों की भारी कमी के कारण मरीजों को ठीक ढंग से इलाज नहीं मिल पाता है। इस समस्या को दूर करने के लिए इस साल 6 जनवरी को ही प्रशासन को पत्र दिया गया था, लेकिन अब तक उसका कोई जवाब नहीं मिला है।
हड़ताली डाक्टरों की मुख्य मांगें :
- अस्पताल के सभी रेसिडेंट डाक्टरों को पूर्ण मेडिकल बेनिफिट कार्ड दिए जाएं।
- इस पूरी लापरवाही की निष्पक्ष जांच हो और डाक्टरों के आपातकालीन इलाज के लिए एक स्पष्ट लिखित प्रक्रिया लागू की जाए।
- राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के मापदंडों के अनुसार ड्यूटी के घंटे तय किए जाएं।
- अस्पताल में जरूरी इलाज के संसाधन विशेषज्ञ, जांच सुविधाएं, स्वास्थ्य कर्मी और पर्याप्त बिस्तर उपलब्ध कराए जाएं।
फरीदाबाद के इस ईएसआई अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में रोज़ाना करीब 4,500 मरीज आते हैं। इसके अलावा दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, होडल, पानीपत, सोनीपत और रेवाड़ी समेत आसपास के क्षेत्रों से भी मरीजों को यहां इलाज के लिए रेफर किया जाता है।
यह घटना यह दर्शाती है कि जब सरकार और प्रबंधन को डाक्टरों की ही कोई चिंता नहीं है तो मजदूरों के अंशदान से चलने वाले इस अस्पताल में मरीजों की क्या स्थिति होगी। ईएसआईसी के पास धन की कोई कमी नहीं है, फिर भी यहां आने वाले मरीजों तथा स्वास्थ्य कर्मियों और डाक्टरों को अमानवीय परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। बीमार पड़ने पर उन्हें बुनियादी इलाज तक नसीब नहीं होता। यह स्पष्ट है कि ईएसआईसी अस्पतालों में काम करने वालों और मरीजों – दोनों के लिए ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और स्तर लगातार गिर रहा है।
