मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

2 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए ‘उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सर्विसेज कॉरपोरेशन’ (यूपीसीओएस) का गठन किया। सरकार का दावा है कि इस निगम के जरिए सरकारी विभागों में की जाने वाली नियुक्तियों में पूरी पारदर्शिता आएगी। सरकार के अनुसार, सभी आउटसोर्स मज़दूरों – चाहे वे कुशल हों, अर्धकुशल हों या अकुशल – को उचित वेतन दिया जाएगा। उनके बैंक खातों में हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच सीधे वेतन ट्रांसफर किया जाएगा। साथ ही, ईपीएफ और ईएसआईसी का फंड तय समय पर जमा होगा, जिसे कर्मचारी ऑनलाइन देख भी सकेंगे। इसके अलावा, एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, दिव्यांगजनों और भूतपूर्व सैनिकों को नियमों के तहत आरक्षण दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए सरकार सीधे गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस पोर्टल के माध्यम से अधिकृत आउटसोर्सिंग संस्थाओं का चयन करेगी।
सरकारी विभागों में अब अधिक से अधिक प्रकार के काम आउटसोर्स मज़दूरों द्वारा करवाए जाते हैं। ये आउटसोर्स मज़दूर सरकारी विभागों में काम करने के लिए किसी तीसरी संस्था या ठेकेदार द्वारा नियुक्त किये जाते हैं। ठेकेदार संस्था मज़दूरों के ठेके की अवधि, वेतन व अन्य बेनिफिट निर्धारित करती है, जिसके लिए सरकार की कोई ज़िम्मेदारी नहीं होती है।
उत्तर प्रदेश सरकार खुद यह मान रही है कि अब तक सरकारी विभागों में काम करने वाले आउटसोर्स मजदूरों के साथ बड़े पैमाने पर अन्याय और शोषण होता रहा है। मजदूरों को उनके कानूनी वेतन से तथा ईएसआई व प्रोविडेंट फंड से वंचित किया जाता है । सरकारी विभागों में ठेके की नियुक्तियों में भारी धांधली होती है और मोटी रिश्वत खाई जाती है।
एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार के 93 विभागों में लगभग 11 लाख कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे हैं। हाल के दिनों में ठेके पर काम करने वाले शिक्षक, बिजली कर्मचारी, स्वास्थ्य कर्मी आदि पक्की नौकरी के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी बिजली विभाग में ही लगभग 75,000 से 78,000 आउटसोर्स कर्मचारी हैं, जो अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में 11 लाख लोग ठेके पर काम कर रहे हैं जबकि राज्य में नियमित नौकरियों के लगभग 11 लाख पद खाली पड़े हैं । यह साफ जाहिर करता है कि सरकार हर विभाग में स्थायी नियुक्तियां करने के बजाय लोगों को ठेके पर भर्ती कर रही है। यहाँ तक कि उत्तर प्रदेश पुलिस की आपातकालीन सेवा में भी कर्मचारी ठेके पर ही काम कर रहे हैं। इसी तरह, स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत लगभग 98,000 ठेका कर्मी हैं, जबकि उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में लगभग 35,000 ठेके पर ड्राइवर और कंडक्टर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
‘उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सर्विसेज कॉरपोरेशन’ का गठन करके उत्तर प्रदेश राज्य सरकार वास्तव में पक्की और स्थायी नौकरी खत्म करने जा रही है। आज समाज के सबसे बुनियादी और अनिवार्य क्षेत्रों – जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और परिवहन – में लाखों पद खाली पड़े हैं। इन खाली पदों को नियमित और स्थायी नियुक्तियों से भरने के बजाय, सरकार पूंजीपतियों के मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए आउटसोर्सिंग का रास्ता अपना रही है। ज्यादा से ज्यादा संख्या में मज़दूरों को बेहद कम वेतन पर, बिना किसी सामाजिक सुरक्षा के, ज्यादा से ज्यादा घंटे काम करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा ।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह प्रचार सरासर भ्रामक और झूठा है कि इस निगम के गठन से मज़दूरों को उनके अधिकार मिलेंगे। हकीकत इसकी बिलकुल उल्टी है। यह व्यवस्था ठेकेदारी प्रथा के अंतर्गत मजदूरों के बर्बर शोषण को संस्थागत करने और कानूनी वैधता देने, तथा मज़दूरों के सुरक्षित रोज़गार के हक़ को छीनने की एक सोची-समझी तरकीब है।
