हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजिनीयर हड़ताल पर क्यों?

हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा का आह्वान

पैरेलल लाइसेंस प्रणाली व स्मार्ट मीटर योजना बंद के आम जनता पर प्रभाव

साथियों,

हरियाणा में बिजली क्षेत्र में सरकार तेजी से निजीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है जिसका सीधा असर कर्मचारी, आम जनता पर पड़ने वाला है हरियाणा सरकार ने कर्मचारी किसानों आम जनता के विरोध के बाद भी पैरेलल लाइसेंस प्रणाली समानांतर बिजली वितरण व्यवस्था व स्मार्ट मीटरिंग योजना को निजी हाथों में सोपनें का फैसला कर लिया है। हरियाणा बिजली रेगुलेटरी कमिशन (HERC) द्वारा कर्मचारी किसानों के भारी विरोध के बाद इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को समानांतर बिजली वितरण के लिए 19अक्टूबर को लाइसेंस जारी कर दिया गया है।

आम जनता के टैक्स के पैसे से खड़ी की गई व्यवस्था को बड़े पूंजी पतियों को फायदा पहुंचाने के लिए बिजली निगमों को बेचने की प्रक्रिया चालू कर दी गई है। वर्ष 1998में बिजली बोर्ड को वितिय घाटा 498करोड़ दिखाकर सुधारिकरण के नाम पर बोर्ड को तोड़कर चार बिजली निगम बनाए गए लेकिन आज ये घाटा 498करोड़ से बढ़कर 19000करोड़ पार हो गया हरियाणा सरकार समीक्षा करने की बजाय नीजिकरण नीतियों को आगे बढ़ा रही हैं।

पैरेलल लाइसेंस प्रणाली समानांतर बिजली वितरण व्यवस्था का आम जनता व किसानों पर प्रभाव

HERC ने यूनियनों, जनसंगठनों, किसान व मजदूर संगठनों विपक्ष की आवाज को दरकिनार करते हुए गुरूग्राम व नूंह को इलेवन पावर प्राइवेट कंपनी को लाइसेंस जारी कर दिया है। अकेला गुरूग्राम व नूंह पूरे दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की आमदनी का 42%राजस्व देता है। बिजली निगम उच्च संस्थाओं को महंगी रेट पर बिजली बेचकर उससे होने वाली आमदनी से गरीब,किसानव आम उपभोक्ताओं को क्रोस सब्सीडी दी जाती है,प्राइवेट होने के बाद जिसका असर आम जनता पर पड़ेगा। राज्य बिजली कंपनियों को अपनी अवसर संरचना निजी कंपनियों को उपलब्ध करानी होगी और जिसका रखरखाव नेटवर्क विस्तार नुकसान का बोझ राज्य कंपनियों पर रहेगा। दूसरी ओर निजी कंपनियां केवल लाभदायक उपभोक्ताओं,बड़े उद्योगों,मॉल,आईटी पार्कों को बिजली सप्लाई देंगी और गरीब उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी सार्वजनिक डिस्कॉम पर रहेगी। सार्वजनिक क्षेत्र नुकसान उठाएगा,निजी कंपनियां इस क्षेत्र में लाभ कमाएंगी,राज्य बिजली कंपनी कमजोर हो जाएगी,क्रॉस सब्सिडी समाप्त होगी बिजली की दर बढ़ेगी,डिस्कॉम निजीकरण की ओर से धकेले जाएंगे,क्रॉस सब्सिडी व्यवस्था समाप्त हो जाएगी,गरीब आदमी की पहुंच से बिजली खरीदना दूर हो जाएगा।

स्मार्ट मीटर योजना का दुष्प्रभाव

बिजली मंत्रालय ने निजी क्षेत्र कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए तो TOTEX मॉडल प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाई जा रहे हैं। अभी तक हरियाणा में 8.73लाख मीटर लग चुके हैं। इन स्मार्ट मीटर के लगने से आम उपभोक्ता को मिलने वाली सब्सिडी खत्म होगी। बिजली के रेट फिक्स स्लैब सिस्टम की बजाय घंटे आधारित रेट तय होंगे जिसका सीधा-सीधा असर प्रदेश की 2.6करोड़ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

गैस सब्सिडी, बीएसएनएल की तरह बिजली निगम की हालत होगी।अदानी और टाटा जैसी बड़ी निजी कंपनी इस स्मार्ट मीटर योजना को लगाने के लिए उतावली हैं। हरियाणा सरकार एक बार फ्री में स्मार्ट मीटर लगाकर आम जनता को भ्रमित करने का काम कर रही है और होने वाले संभावित खतरों से आम जनता अनभिज्ञ है।

समानांतर बिजली वितरण व्यवस्था केवल गुरुग्राम और नूह तक सीमित नहीं है। हरियाणा सरकार ने इसका आगामी प्रारूप और जिले भी बेचने का टारगेट तय कर लिया है जिसमें मुख्य रूप से आमदनी वाले जिले,कम लाइन लौसेज वाले शामिल हैं। मुख्य फरीदाबाद, करनाल,पानीपत, पंचकूला, हिसार हैं जिनकी प्राइवेट वितरण व्यवस्था के लिए आगामी तैयारी चल रही है,इससे आम जनता प्रभावित होगी। हरियाणा सरकार संवेधानिक मौलिक जिम्मेदारी से पीछे हट रही है।

कर्मचारियों की संख्या घटेगी, कच्ची नौकरियां होगी, रोजगार का संकट पैदा होगा।

आओ मिलकर इन प्राईवेटाइजेशन नीतियों का विरोध करें और सरकार को पैरेलल लाइसेंस जारी करने का विरोध दर्ज कराते हुए वापस कराने का काम करें।

सभी किसानों मजदूर व्यापारियों आम उपभोक्ताओं जन संगठनों से अपील है कि बिजली निगम बचाने की लड़ाई में बिजली कर्मचारियों में इंजीनियरों का सहयोग करें और सरकार के फैसलों का विरोध करें।

मुख्य मांगे:

1. पैरेलल लाइसेंस प्रणाली गुरुग्राम व नूंह को बेचना बंद करो।

2.स्मार्ट मीटरिंग योजना बंद हो।

3.अलग कृषि वितरण निगम बनाने पर रोक लगाओ।

4.कर्मचारियों के मुद्दों का समाधान करों।

कर्मचारी एवं इंजीनियर एकता जिन्दाबाद!

सांझा संघर्ष जिन्दाबाद!

नीजीकरण नीतियां बंद करो!

निवेदक: हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा

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