AIFEE ने हरियाणा के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों को बधाई दी है, जिन्होंने राज्य सरकार को समानांतर वितरण लाइसेंस का विरोध करने के लिए मजबूर कर दिया।

ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉयीज (AIFEE) का बयान


(अंग्रेजी बयान का अनुवाद)

हरियाणा के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के लिए एक ऐतिहासिक जीत

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने धारा 108 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, राज्य विद्युत नियामक आयोग को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस रद्द करने का निर्देश दिया है।

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हरियाणा में निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों की ऐतिहासिक जीत

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ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉयीज (AIFEE)—जो ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) से संबद्ध है और 28 राज्यों के विभिन्न संगठनों के सदस्यों व पदाधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है—हरियाणा के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों द्वारा दिखाई गई एकता को ‘लाल सलाम’ पेश करता है। ‘हरियाणा राज्य विद्युत कर्मचारी व अभियंता संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले, उन्होंने दो दिनों की एक ऐतिहासिक राज्यव्यापी हड़ताल सफलतापूर्वक पूरी की। 21 अक्टूबर की रात 10:00 बजे शुरू हुई यह हड़ताल 22 और 23 अक्टूबर को पूरी तीव्रता के साथ जारी रही, जिसने हरियाणा सरकार को कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर दिया। संघर्ष समिति के साथ हुई बातचीत के बाद, हरियाणा के मुख्यमंत्री ने बिजलीअधिनियम, 2003 की धारा 108 का इस्तेमाल करते हुए, हरियाणा राज्य विद्युत नियामक आयोग (HSERC) को कुछ रणनीतिक निर्देश जारी किए। इन निर्देशों का उद्देश्य ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को गुरुग्राम और नूंह क्षेत्रों के लिए दिए गए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस से जुड़े फैसले को पलटना था, ताकि बिजली उपभोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के हितों की रक्षा की जा सके। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से इस फैसले की घोषणा की है और स्पष्ट किया है कि हरियाणा में समानांतर वितरण लाइसेंस की अनुमति नहीं दी जाएगी। इन आश्वासनों को देखते हुए, संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है।

इस हड़ताल में पूरे राज्य से लगभग 40,000 से 55,000 बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने हिस्सा लिया। दक्षिण और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगमों (DISCOMs) के साथ-साथ ट्रांसमिशन कंपनी में भी लगभग सभी कर्मचारियों ने इसमें भाग लिया। इस हड़ताल के कारण हरियाणा के बड़े हिस्सों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। बिजली कर्मचारियों की लंबी हड़ताल के कारण घरों, जलापूर्ति प्रणालियों, कार्यालयों और औद्योगिक उपभोक्ताओं तक बिजली की आपूर्ति बाधित हुई। हालाँकि राज्य भर के नागरिकों को कई घंटों तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा, फिर भी वे इस आंदोलन के समर्थन में एकजुट रहे। किसान संगठनों, मजदूर यूनियनों और आम उपभोक्ताओं ने कई तरह की परेशानियों का सामना करने के बावजूद अपना समर्थन दिया। कर्मचारियों ने यह सुनिश्चित किया कि अस्पतालों में जरूरी सेवाओं की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रहे। यह जन-आंदोलन हड़ताल की ताकत और लोगों की एकता की बदौलत सफल रहा।

धारा 108 के तहत नीतिगत निर्देश जारी करने के सरकार के फैसले और मुख्यमंत्री की इस सार्वजनिक घोषणा कि हरियाणा में ‘समांतर’ (प्रतिस्पर्धी) बिजली लाइसेंसों की अनुमति नहीं दी जाएगी, को इस संघर्ष में एक बड़ी जीत माना जा सकता है। ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉयीज (AIFEE) इस कदम का स्वागत करता है और हरियाणा राज्य के सभी कर्मचारियों को बधाई देता है।

48 घंटे की हड़ताल ने यह दिखा दिया है कि बिजली कर्मचारी और इंजीनियर—जिन्हें जनता का समर्थन हासिल है—निजी मुनाफे के लिए सार्वजनिक वितरण कंपनियों को कमजोर नहीं होने देंगे। ‘समानांतर लाइसेंसिंग’ के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कि नीतिगत निर्देश औपचारिक रूप से जारी नहीं हो जाते, अपीलों पर कार्रवाई नहीं हो जाती, और इस तरह की लाइसेंसिंग का खतरा पूरी तरह से टल नहीं जाता।

एक बार फिर, बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों, किसानों, मजदूरों और राज्य की उन जनता को बधाई, जिन्होंने इस संघर्ष को सफल बनाया।

इंकलाब जिंदाबाद!

संघर्ष की हमेशा जीत होगी!

एकजुटता के साथ,

कॉमरेड एम. मूर्ति, अध्यक्ष (तमिलनाडु)
कामरेड समीउल्ला, कार्यकारी अध्यक्ष (कर्नाटक)
कॉमरेड मोहन शर्मा, महासचिव (महाराष्ट्र)
कॉमरेड कृष्णा भोयर, उप महासचिव (मुंबई)
ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉयीज़

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