8 दिसंबर 2021 को पूरे महाराष्ट्र में संशोधित बिजली (संशोधन) विधेयक 2021 के खिलाफ बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों का जोरदार विरोध

कॉमरेड कृष्णा भोयर, महाराष्ट्र राज्य बिजली कर्मचारी, इंजीनियर अधिकारी संघर्ष समिति के द्वारा रिपोर्ट

महाराष्ट्र राज्य बिजली मज़दूर, इंजीनियर अधिकारी संघर्ष समिति की ओर से 8 दिसंबर को कोल्हापुर, सांगली, पुणे, नागपुर, सोलापुर, नासिक, औरंगाबाद और जालना सहित पूरे महाराष्ट्र में संशोधित बिजली अधिनियम 2021 का विरोध करने के लिए गेट मीटिंग कर विरोध प्रदर्शन किया गया।
MSEDCL के सामने धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र राज्य विद्युत मज़दूर संघ के महासचिव कॉमरेड कृष्णा भोयर ने आम जनता, किसानों, बिजली उपभोक्ताओं और मजदूरों, इंजीनियरों और अधिकारियों पर बिजली (संशोधन) विधेयक 2021 के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। दौंड साहेब वर्गास क्षेत्र महिला मोर्चा अध्यक्ष श्रीमती भारती भोयर मैडम ने जनसभा को संबोधित किया। बैठक का संचालन कॉमरेड शरद मोकल ने किया और धन्यवाद प्रस्ताव कॉमरेड दत्तात्रेय कांबले ने दिया।
बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों के एक प्रमुख नेता कॉमरेड मोहन शर्मा जी की अध्यक्षता में 3 दिसंबर, 2021 को दिल्ली में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसीओईईई) बुलाई गई थी। एनसीसीओईईई ने पूरे देश में निम्नलिखित आंदोलन कार्यक्रम का निर्णय लिया।
1) 8 दिसंबर 2021 को देश भर की सभी बिजली उद्योग कंपनियों के कार्यालयों के सामने घर-घर जाकर व्यापक प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है।
2) 15 दिसंबर 2021 को देश भर के हजारों बिजली कर्मचारी, इंजीनियर और अधिकारी संसद भवन जंतर मंतर, दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
3) यदि संसद के चालू सत्र में संशोधित विद्युत अधिनियम 2021 लाने का प्रयास किया जाता है, तो जिस दिन विधेयक संसद में पेश होगा, उसी दिन पूरे देश में हड़ताल का आह्वान किया जाएगा।
4) संसद के बजट सत्र का दूसरा सत्र 1 फरवरी, 2022 से शुरू होगा। सत्र के पहले दिन यह निर्णय लिया गया कि देश भर के कर्मचारी, इंजीनियर और अधिकारी बिजली बिल का विरोध करने के लिए हड़ताल पर जाएंगे।
5) देश भर के सभी दलों के मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री और सांसद को एक बयान देकर बिजली विधेयक के निहितार्थ को समझाने का निर्णय लिया गया।

 

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Akash
Akash
11 months ago

बिजली मजदूरों के संघर्षों का पूर्णतः समर्थन करते हुए ये बात कहना चाहता हूं की ये लड़ाई सिर्फ बिजली मजदूरों की नही बल्कि सभी क्षेत्रों के मजदूरों की भी है जो बिजली उपभोक्ता है और किसान जिन्हे कुछ रियायती मिली है निजी कम्पनी कभी नही देगी, इसलिए निजीकरण के खिलाफ़ हम सभी को मजदूरों, उपभोगताओ किसानों और सभी सार्वजनिक क्षेत्रों के मजगोरो को साथ आना होगा और बिजली (संशोधन) विधेयक 2021 का और किसीभी PSU के निजीकरण का विरोध करना होगा