वेतन बढ़ोतरी और अन्य जायज़ माँगों के लिए सड़कों पर उतरे हड़ताली मज़दूरों के हक़ में आवाज़ बुलंद करो! हड़तालों को कुचलने की दमन की कार्रवाइयों का पुरज़ोर विरोध करो!

कारख़ाना मज़दूर यूनियन, पंजाब, टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन, पंजाब और नौजवान भारत सभा का आह्वान

भाइयो और बहनो,

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश और हरियाणा के नोएडा-मानेसर-फरीदाबाद-गुरुग्राम आदि शहरों में वेतन बढ़ोतरी और काम की बुरी हालतों के ख़िलाफ़ कारख़ाना मज़दूरों की जुझारू हड़तालों की ख़बरें आप तक पहुँच चुकी होंगी। अप्रैल महीना शुरू होते ही, अलग-अलग तरह के, एक के बाद एक कारखानों में हड़तालों का सिलसिला शुरू हो गया था। हड़तालों की चिंगारियाँ पंजाब के लालड़ू, राजस्थान के भिवाड़ी, पथरी, यूपी के लखनऊ आदि शहरों तक भी फैल चुकी हैं। इससे पहले भी देश के अलग-अलग हिस्सों में रिफ़ाइनरी और अन्य उद्योगों के मज़दूरों ने आठ घंटे काम, वेतन बढ़ोतरी, काम के बेहतर हालात आदि माँगों को लेकर बड़ी हड़तालें की हैं। इस तरह लंबे अंतराल के बाद देश के मज़दूरों का बड़ा और जायज़ आंदोलन छिड़ा है।

कमरतोड़ महँगाई ने पहले ही मज़दूरों का बुरा हाल कर रखा था। लंबे समय से मज़दूरों के वेतन नहीं बढ़ाए जा रहे थे। बेहद कम वेतन पर हाड़तोड़ मेहनत करने पर मज़दूर मजबूर थे। अब अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर थोपे गए नाजायज़ युद्ध ने हालात बद से बदतर बना दिए हैं। रसोई गैस की कमी और कालाबाज़ारी से अचानक बढ़ी महँगाई मज़दूरों पर कहर बनकर टूटी है। ऐसे हालात में ज़रूरी था कि सरकार गरीबों को राहत पहुँचाने के लिए कदम उठाती और मज़दूरों के वेतन भी तुरंत बढ़ाए जाते। लेकिन अपने लुटेरे-मुनाफ़ाख़ोर चरित्र के मुताबिक, मज़दूरों को मशीनों के पुर्ज़े समझने वाले पूँजीपति और सरकारों ने मज़दूरों की समस्याओं और माँगों को अनदेखा किया है। ऐसे हालात में मज़दूरों के पास काम ठप्प करके, हड़ताल कर सड़कों पर उतरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। इसलिए मज़दूरों की ये हड़तालें पूरी तरह जायज़ हैं। हम संघर्षशील मज़दूरों का पुरज़ोर समर्थन करते हुए उन्हें जुझारू सलाम पेश करते हैं।

मज़दूर संघर्ष के दबाव में हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों को न्यूनतम वेतन में कुछ बढ़ौतरी की घोषणा करनी पड़ी है। संघर्षशील मज़दूर कम बढ़ौतरी से सहमत नहीं हैं और संघर्ष के मैदान में डटे हुए हैं। उधर इस नाकाफी बढ़ौतरी को भी लागू करने को कारख़ाना मालिक भी तैयार नहीं हैं। अब पूँजीपति और सरकार मज़दूर संघर्ष को बर्बर दमन के ज़रिए कुचलने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। बर्बर लाठीचार्ज किए जा रहे हैं, आँसू गैस के गोले फेंके जा रहे हैं, तोड़फोड़-आगज़नी करवाई जा रही है। आम मज़दूरों, कार्यकर्ताओं, नेताओं की गिरफ़्तारियाँ की जा रही हैं। मज़दूर संघर्ष को बदनाम करने के लिए गोदी मीडिया के ज़रिए पाकिस्तानी कनेक्शन का झूठ फैलाया जा रहा है। संघर्षशील मज़दूरों और कार्यकर्ताओं को अर्बन नक्सल बताकर संगीन धाराएँ लगाई जा रही हैं। हड़ताल की सही ख़बरें पहुँचाने वाले जन-मीडिया को डराया-धमकाया जा रहा है, दमन का शिकार बनाया जा रहा है। इस सबने एक बार फिर साबित किया है कि सरकार और पुलिस-प्रशासन का काम मज़दूरों-मेहनतकशों की सेवा नहीं बल्कि पूँजीपतियों की सेवा करना है।

हम मज़दूरों के संघर्ष को कुचलने की सरकार-पुलिस-प्रशासन-पूँजीपतियों के नापाक गठजोड़ की इन तमाम दमनात्मक कार्रवाइयों का पुरज़ोर विरोध करते हैं। हम माँग करते हैं कि –

1. आठ घंटे काम का न्यूनतम वेतन 26,000 लागू किया जाए। दिहाड़ी-पीस रेट इसी मुताबिक तय हो। स्त्री मज़दूरों को बराबर काम का बराबर वेतन मिले।

2. आठ घंटे दिहाड़ी का क़ानून सख़्ती से लागू हो। जबरन ओवरटाइम बंद हो। ओवरटाइम का दुगना भुगतान हो। साप्ताहिक और अन्य छुट्टियाँ लागू की जाएँ।

3. हड़तालों को कुचलने की तमाम दमनात्मक कार्रवाइयाँ बंद की जाएँ। गिरफ़्तार मज़दूरों, कार्यकर्ताओं, नेताओं को तुरंत रिहा किया जाए। थोपे गए सारे नाजायज़ पुलिस केस रद्द किए जाएँ।

4. ठेकेदारी, पीस रेट, दिहाड़ी पर काम करने वाले कच्चे मज़दूरों को पक्का किया जाए। कार्य-परिस्थितियों में सुधार किया जाए। हादसों से सुरक्षा के पूर्ण इंतज़ाम हों।

5. मज़दूरों के तमाम क़ानूनी श्रम अधिकार सख़्ती से लागू किए जाएँ, श्रम क़ानूनों में मज़दूर विरोधी बदलाव रद्द किए जाएँ।

6. महँगाई कम करने के लिए सरकार उचित क़दम उठाए।

लंबे अरसे बाद भारत के अलग-अलग हिस्सों में अपने हक़-अधिकारों के लिए इतने बड़े स्तर पर औद्योगिक मज़दूर सड़कों पर उतरे हैं। हमें इस संघर्ष का पुरज़ोर समर्थन करना होगा। साथ ही इस संघर्ष को शहर-शहर, गाँव-गाँव पहुँचाना होगा। हर कारखाने तक फैलाना होगा। देश में पूँजीपतियों और उनकी सेवक सरकारों के जंगलराज ने मज़दूरों के हालात बद से बदतर कर दिए हैं। ये हालात बदलने चाहिए। उपरोक्त माँगों पर मज़दूरों का एकजुट संघर्ष ही हालात बेहतर बना सकता है। इसलिए आओ, संघर्षशील मज़दूरों का साथ दें और उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर खुद भी संघर्ष के मैदान में उतरें।

अपीलकर्ता-

कारख़ाना मज़दूर यूनियन, पंजाब

टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन, पंजाब

नौजवान भारत सभा

संपर्क फोन नं. – 9646150249 (लखविंदर), 9888816135 (विश्वनाथ)

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