संयुक्त किसान मोर्चा राज्य सरकार और उसकी पुलिस द्वारा मजदूरों के आंदोलन को दबाने के लिए की जा रही सभी दमनात्मक कार्यवाही की कड़ी निंदा करती है और उनके आंदोलन व माँगों का समर्थन करती है

संयुक्त किसान मोर्चा, उत्तर प्रदेश का प्रेस बयान

उत्तर प्रदेश, हरियाणा और देश के अन्य क्षेत्रों के मजदूर वेतन-वृद्धि एवं काम की सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग को लेकर पिछले कुछ दिनों से जुझारू संघर्ष का रहे हैं उनके शांतिपूर्ण संघर्ष और नेताओं का राज्य सरकार और पुलिस द्वारा दमन राज्य तथा उसकी यंत्रणा का असली चरित्र दर्शाता है। यह लोकतंत्र नहीं पूंजीतंत्र है। इस राज्य व्यवस्था को बदलना ही पड़ेगा।

पिछले दो हफ्तों में हजारों मजदूरों ने अनिवार्य आठ घंटे के कार्यदिवस, सम्मानजनक वेतन, अनिवार्य ओवरटाइम की समाप्ति और दुगुने वेतन पर ओवरटाइम भुगतान की मांग को लेकर हड़ताल की है। नोएडा, मानेसर, फरीदाबाद और गुरुग्राम में शुरू हुए ये संघर्ष उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कई अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में तेजी से फैल गए हैं।

चाहे वे हमारे देश के किसान हों या स्थायी या संविदा आधार पर काम करने वाले श्रमिक, उनका संघर्ष अपनी आजीविका की रक्षा और 21वीं सदी के मनुष्यों के लिए सम्मानजनक जीवन के लिए है। उनका संघर्ष केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे दमन के खिलाफ है। उनका संघर्ष मूल रूप से पूंजीवादी शासक वर्ग के खिलाफ है जो मजदूरों और किसानों दोनों का शोषण करने के लिए किसी भी हद तक जा रहा है। इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि वे एक-दूसरे के संघर्षों का समर्थन करें।

यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि शायद ही कोई किसान परिवार ऐसा हो जिसके सदस्य “मजदूर” की श्रेणी में न आते हों। इसलिए यह स्वाभाविक है कि किसान और मजदूर शोषक पूंजीवादी वर्ग के खिलाफ अपनी लड़ाई में सहयोगी हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा जारी प्रेस बयान नीचे दिया गया है।

संयुक्त किसान मोर्चा, उत्तर प्रदेश का प्रेस बयान

एनसीआर समेत राज्य के अन्य क्षेत्रों में कारखानों में चल रहे मजदूर आंदोलनों के समर्थन एवं उन पर होने वाले पुलिसिया दमन के खिलाफ प्रेस बयान

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नोएडा, ग्रेटर नोएडा एवं राज्य और देश के अन्य क्षेत्रों के औद्योगिक संस्थानों में वेतन-वृद्धि एवं काम की सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग को लेकर पिछले कुछ दिनों से मजदूरों का जुझारू संघर्ष चल रहा है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा की पुलिस ने उनके शांतिपूर्ण संघर्ष को तोड़ने के लिए अंधाधुंध लाठीचार्ज किया है और अश्रु गैस के गोले दागे हैं। इस पुलिसिया दमन में दर्जनों मजदूर घायल हुए हैं और 360 से अधिक को झूठे मुकदमों में फंसा कर गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार लोगों में इंकलाबी मजदूर केन्द्र के नेता श्यामवीर, हरीश और राजू, बेलासोनिका मजदूर यूनियन के अजीत और पिंटू यादव, मुंजाल शोवा के आकाश आदि शामिल हैं। इन सबों पर 9 अप्रैल को तोड़फोड़ करने, आगजनी जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। इनके अलावा नोएडा में बिगुल मजदूर दस्ता के कार्यकर्ता रूपेश, आकृति, सृष्टि एवं मनीषा को गिरफ्तार कर लिया गया है। सीटू के नेताओं जय भगवान, रूपेश वर्मा, विनोद सहित कई मजदूर नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया और उनको फेसबुक पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाकर नोटिस जारी किया गया है। अधिकांश गिरफ्तार लोगों को कोर्ट में पेश किए बिना सीधे जेल भेज दिया गया है।

लखनऊ पुलिस द्वारा कवयित्री कात्यायनी, पत्रकार सत्यम वर्मा एवं अमर उजाला के भूतपूर्व संपादक संजय श्रीवास्तव को भी हिरासत में लिया गया है। इतना ही नहीं इन गिरफ्तार लोगों की रिहाई के लिए गए दो वकीलों को भी गिरफ्तार किया गया है। अखबारी रिपोर्टों के अनुसार अभी तक 360 से अधिक मजदूरों, मजदूर यूनियनों के नेताओं-कार्यकर्ताओं एवं उनके समर्थकों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सरकार कुछ गिरफ्तार मजदूर नेताओं पर ‘नक्सलवादी’ एवं ‘आतंकवादी’ होने का आरोप लगाकर उन्हें यूएपीए की धाराओं में लम्बे समय तक जेलों में रखने की साज़िश कर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार की ऐसी साजिश उसकी फासीवादी प्रवृति को दर्शाती है।

महत्वपूर्ण बात है कि ये सभी मज़दूर ग्रामीण इलाकों से, जहाँ बेरोज़गारी की स्थिति बहुत भयंकर है, प्रवासी मज़दूर हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा की राज्य इकाई उत्तर प्रदेश सरकार और उसकी पुलिस द्वारा मजदूरों के आंदोलन को दबाने के लिए की जा रही सभी दमनात्मक कार्यवाही की कड़ी निन्दा करती है। साथ ही हम किसान मजदूरों के आंदोलन का समर्थन करते हुए राज्य सरकार से मांग करते हैं कि –

* सभी गिरफ्तार मजदूरों एवं उनके नेताओं व कार्यकर्ताओं को अविलम्ब बिना शर्त रिहा किया जायें;

* सभी पर थोपे गए फर्जी मुकदमे वापस लिए जायें;

* मजदूरों पर पुलिस दमन बन्द किये जायें;

* मजदूरों की वेतन-वृद्धि, न्यूनतम 26 हज़ार रुपये प्रतिमाह सहित सभी न्यायपूर्ण मांगों को पूरे किये जायें;

* 9 अप्रैल की हिंसा एवं पुलिस दमन की न्यायिक जांच की जाये और दोषी पुलिसकर्मियों एवं फैक्ट्री प्रबंधकों पर कड़ी कार्यवाही की जायें।

जारीकर्ता:

राज्य कमेटी, संयुक्त किसान मोर्चा, उत्तर प्रदेश

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