मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट
1 मई को राजस्थान के हनुमानगढ़ की उपतहसील रामगढ़ के मुख्य चौक शहीद ए आज़म भगत सिंह प्रांगण में मज़दूर एकता कमेटी के बैनर तले, मई दिवस पर सभा का आयोजन किया गया। सभा में मज़दूरों के हक़ों के संघर्ष में बलिदान हुए शिकागो के शहीदों को याद किया गया और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
सभा के भागीदारों ने बुलंद आवाज़ में नारे लगाए – ‘मई दिवस ज़िंदाबाद!’, ‘साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!’, ‘शिकागो के शहीदों को लाल सलाम!’, ‘राज हो देश में मज़दूरों और किसानों का!’, ‘मज़दूर आंदोलन पर राजकीय दमन नहीं चलेगा!’, ‘लाल किले पर लाल निशान, मांग रहा है हिन्दोस्तान!’, ‘सबको शिक्षा एक समान मांग रहा है हिन्दोस्तान!’, ‘महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ संघर्ष तेज़ करो!’, ‘समान काम के लिए समान वेतन लागू करो!’
सभा को संबोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि आज से लगभग 140 साल पहले मज़दूरों के द्वारा किए गए संघर्ष और बलिदान की वजह से हमें 15 घंटे के काम की बजाय 8 घंटे कार्य निर्धारित करने तथा 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे परिवार के लिए समय का अधिकार प्राप्त हुआ था। आज यह अधिकार हमसे छीना जा रहा है।
लोक राज संगठन के सर्व हिंद उपाध्यक्ष श्री हनुमान प्रसाद शर्मा ने बताया कि मज़दूर दुनिया में हर वस्तु का निर्माता है। परंतु उन्हें खुद अपने हक़ों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पूंजीवादी शासन व्यवस्था में मेहनतकश वर्ग का बेरहमी से शोषण किया जा रहा है। उन्हें अपने अधिकारों से सदैव वंचित किया जा रहा है। उन्हें इज़्ज़त से जीने लायक वेतन तक नहीं दिया जा रहा है। आज मज़दूर अपने वेतन और रोज़ी रोटी के अधिकारों की सुरक्षा की मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया में निजीकरण और उदारीकरण की आर्थिक नीतियों के माध्यम से स्थाई नौकरियों को समाप्त कर दिया गया है। इस पूंजीवादी व्यवस्था में मज़दूरों के हितों के विरुद्ध क़ानून बनाकर, मज़दूरों के शोषण को बढ़ाया जा रहा है। हमें अपने एकजुट संघर्ष को और मजबूत करना होगा।
हमें याद रखना होगा कि हम मज़दूरों ने अंग्रेजों के समय से आज तक अपने संघर्षों से जो थोड़े बहुत अधिकार प्राप्त किये थे, अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए जो क़ानून बनवाए थे, उनके स्थान पर चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को लागू किया जा रहा है। स्थाई नौकरियां ख़त्म की जा रही है, ठेकेदारी प्रथा के माध्यम से आज कर्मचारियों का खून चूसा जा रहा है। पुरानी पेंशन स्कीम को ख़त्म करने की दिशा में सरकारें आगे बढ़ रही है।
अंत में उन्होंने कहा कि देश में सरकार चाहे कांग्रेस पार्टी हो या भाजपा की, दोनों पार्टियां मुख्य तौर पर देश के पूंजीपतियों के मैनेजर का काम करती हैं। जब एक मैनेजर बदनाम हो जाता है तो पूंजीपति दूसरे मैनेजर को लाते हैं। हमारी समस्याओं की जड़ पूंजीवादी व्यवस्था में है। हम मज़दूरों-किसानों को संगठित होकर पूंजीवादी व्यवस्था की जगह पर मज़दूरों-किसानों का राज स्थापित करना होगा। यही देश के सभी मज़दूरों-किसानों की मुक्ति का रास्ता है।
सभा में खेताराम सिंगाठिया, मनीराम लकेसर, कृष्ण कुमार भांभू, अशोक वर्मा और कुलदीप भांभू ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर ताराचंद स्वामी, बलेंदर सिंह फोजी, ओम सांगर, धर्मपाल कस्वां, राम मूर्ति, देवेंद्र सहित जयप्रकाश शर्मा और भूप शर्मा रामस्वरूप आदि के साथ-साथ अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
