मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

लगातार बढ़ता शोषण और असहनीय काम की स्थिति, मज़दूरों को खुद-ब-खुद संगठित होकर आवाज़ उठाने के लिए मजबूर कर देती है। यही इन दिनों देश के विभिन्न भागों में देखने को मिल रहा है। उनमें से कानपुर का औद्योगिक क्षेत्र एक है। यहां एक के बाद, एक फैक्ट्रियों में मज़दूर पूरी मज़दूरी न दिए जाने, ओवरटाइमिंग का डबल न दिए जाने और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर सड़क पर उतर रहे हैं।
25 मई, 2026 को कानपुर के बिल्हौर स्थित थ्रेड इंडिया लिमिटेड के गेट पर मज़दूरों ने वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इसमें सबसे बड़ी संख्या महिलाओं की थी।
मज़दूरों ने कहा कि प्रबंधन से वेतन बढ़ोतरी के संबंध में कई बार बात की जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। हालात अब बर्दाश्त से बाहर हो गए हैं। यह लोहिया ग्रुप की कंपनी ‘थ्रेड इंडिया लिमिटेड’ सिंथेटिक धागा बनाने का काम करती है। इसकी दो यूनिटें हैं – कानपुर और बैंगलोर में। इसका वार्षिक राजस्व 200 से 300 करोड़ रुपए है।
बीते 8 साल से काम कर रहे एक मज़दूर ने बताया कि उन्हें आज तक पक्का नहीं किया गया है। उन्हें और उनके जैसे कई मज़दूरों को मात्र 8,500 रुपये ही वेतन दिया जा रहा है। यहां काम करने वाले अधिकांश मज़दूरों की यही स्थिति है।
एक अन्य वरिष्ठ मज़दूर ने बताया, बीते तीन साल से वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। इस कमरतोड़ महंगाई में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। यहां 25-30 साल नौकरी करने के बाद भी मज़दूरों को महज 10 से 12 हजार रुपये महीना वेतन मिल रहा है।
मज़दूर मांग कर रहे हैं कि महंगाई के हिसाब से उनका वेतन कम से कम 18,000 से 20,000 रुपये महीना (या प्रतिदिन 800 से 900 रुपये) होना चाहिए।
21 मई, 2026 को कानपुर के नेरोलैक पेंट फैक्ट्री के मज़दूरों ने गेट के बाहर, सड़क पर वेतन वृद्धि और मज़दूर हितों की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
25 मई, 2026 को कानपुर के सचेंडी के पंचमपुरवा में झुनझुनवाला परिसर स्थित प्लास्टिक बोरी के रोल बनाने वाली ‘झुनझुनवाला फैक्ट्री’ और ‘शिव कृष्णा पालीटेक्स’ में वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर मज़दूरों ने प्रदर्शन किया।
पंचमपुरवा स्थित झुनझुनवाला परिसर में लालू झुनझुनवाला की शिव कृष्णा पालीटेक्स और उनके भाई विवेक की झुनझुनवाला के नाम से प्लास्टिक फैक्ट्री है। दोनों में प्लास्टिक बोरी के रोल बनाए जाते हैं और दोनों फैक्ट्रियों में करीब चार सौ मज़दूर कार्यरत हैं।
शिव कृष्णा पालीटेक्स के कर्मचारियों ने वेतन बढ़ोतरी की मांग करते हुए प्रबंधन के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की। इसे देखकर बगल की झुनझुनवाला फैक्ट्री के मज़दूर भी अपनी मांगों को लेकर आगे आ गए। मज़दूरों की मुख्य मांग है कि सरकार द्वारा तय न्यूनतम मज़दूरी व्यवस्था के तहत उन्हें वेतन और अन्य क़ानूनी सुविधाएं दी जाएं।
इसके अलावा, कानपुर के अन्दर कई जगहों पर मज़दूरों के संगठित होकर अपने अधिकारों के लिये आवाज़ उठाते हुए देखा जा सकता है। बिल्हौर और सचेंडी ही नहीं, बल्कि कानपुर के कोर औद्योगिक क्षेत्रों जैसे पनकी, दादा नगर, जाजमऊ और रूमा में भी संघर्ष की चिंगारी सुलग रही है। इन क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों ठेका और दिहाड़ी मज़दूर अब खुलकर सामने आ रहे हैं। उदाहरण के लिए 9 मई को कानपुर देहात स्थित अरविंद फुटवियर, 15 मई को सचेंडी औद्योगिक क्षेत्र स्थित स्पन माइक्रो, 19 मई को सचेंडी क्षेत्र स्थित भगवती फूड्स (बिस्कुट फैक्ट्री), 19 मई को सचेंडी क्षेत्र स्थित कानपुर प्लास्टिक, 19 मई को बिठूर (मंधना-जीटी रोड) स्थित गोल्डी मसाला फैक्ट्री, 19 मई रनियां औद्योगिक क्षेत्र स्थित मंटोरा ऑयल फैक्ट्री सहित अन्य 2 इकाइयों में, 19 मई को रनियां औद्योगिक क्षेत्र स्थित अनुभव प्लास्ट फैक्ट्री आदि में काम करने वाले मज़दूरों की मांगें सिर्फ़ वेतन बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे श्रम का़नूनों के उल्लंघन, सुरक्षा उपकरणों की कमी, और बिना किसी सामाजिक सुरक्षा (पीएफ/ईएसआई) के जोखिम भरे हालातों में काम कराने के ख़िलाफ़ एकजुट हो रहे हैं। वे कार्यस्थल पर साफ़ एवं पीने के ठंडे पानी, उचित शौचालय, और वेंटिलेशन (छाया) का पुख्ता इंतजाम की मांग कर रहे हैं।
कानपुर के मज़दूरों का संघर्ष साफ़-साफ़ दिखता है कि पूंजीपति मालिकों की मुनाफे़ की हवस को पूरा करने में मज़दूर अपने शोषण को और बर्दाश्त नहीं करेंगे।
