देवास में पटाखा फैक्ट्री में धमाका

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

14 मई को मध्य प्रदेश के देवास जिले की एक अवैध रूप से चलायी जा रही पटाखा फैक्ट्री में भयानक धमाका होने से 8 मज़दूरों की मौत हुयी। कई और मज़दूर गंभीर रूप से घायल हुए। कई मज़दूर तो 90 प्रतिशत तक आग से झुलस गये। जब धमाका हुआ तो 24 मज़दूर वहां काम कर रहे थे और कंपनी के प्रबंधकों में से कोई भी उपस्थित नहीं था।

चश्मदीद गवाहों के अनुसार, फैक्ट्री में शरीर के टुकड़े बिखरे पड़े थे। धमाका इतना भयानक था कि आस-पास के इलाके के मकानों की दीवारें तक हिल गईं। कम घायल मज़दूरों का कहना है कि उन्होंने 112 पर फोन करके पुलिस से मदद मांगी। जब पुलिस पहुंची तो अधिकांश मज़दूर बदहवास थे।

मज़दूरों का कहना है कि 15,000 रुपये के वेतन में ठेकेदार के तहत उनसे 12 घंटे काम करवाया जाता है। आरोप यह भी है कि फैक्ट्री के संचालन को लेकर अधिकारियों द्वारा कोई निरीक्षण नहीं किया जाता है। कंपनी में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। बिहार से मज़दूरों को धूल-मिट्टी में काम करने के बहाने बुलाया जाता था और उसने 12 घंटे काम करवाया जाता था।

यह फैक्टरी देवास के एबी रोड टोंककला में स्थित थी। गांव के स्थानीय लोगों का कहना है कि फक्ट्री में खुलेआम बारूद रखकर पटाखे बनाये जाते थे और सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी की जाती थी। निवासियों ने इसकी शिक़ायत कई बार प्रशासन को किया, लेकिन प्रशासन के विभाग ने कोई भी ठोस कार्यवाही नहीं की। कंपनी के आसपास के गांवों में कंपनी के खि़लाफ़ काफ़ी गुस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्री मालिक का वहां के सांसद के साथ गहरे संबंध हैं, इसलिए उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।

पूंजीपति मालिक ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने की लालच में मज़दूरों की सुरक्षा को ताक पर रखकर उनसे 12-12 घंटे काम करवाते हैं। मज़दूरों को बिना न्यूतनतम वेतन दिए, बिना सामाजिक सुरक्षा दिये, उनसे गुलामों जैसे काम करवाया जाता है। जब कंपनी में कोई भी घटना होती है तो उसमें मज़दूर ही मारे जाते हैं। कोर्ट-कचहरी, शासन-प्रशासन, एसडीएम, पुलिस, सांसद, विधायक, ये सभी मज़दूरों के शोषण और मौत का तमाशा देखते हैं। ऐसी घटनाएं हिन्दोस्तान में हर दिन किसी ने किसी जगह पर होती रहती हैं। पूंजीवादी व्यवस्था में मज़दूरो की जान की कोई क़ीमत नहीं है। पूंजीपति मालिकों को अपने मुनाफ़े से मतलब होता है तथा शासन-प्रशासन, पुलिस, कोर्ट-कचहरी उनके मुनाफ़ों को सुनिश्चित करने के लिये प्रतिबद्ध हैं।

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