सिंगरेनी कोलियरीज के मज़दूरों ने हड़ताल का नोटिस दिया

कॉमरेड अलवंदर वेणु माधव से मिली जानकारी के आधार पर

16,000 से ज़्यादा सदस्यों वाली सिंगरेनी कोलरीज वर्कर्स यूनियन ने सिंगरेनी कोलरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) के मैनेजमेंट को हड़ताल का नोटिस दिया है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अगर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो मज़दूर 8 अगस्त 2026 से हड़ताल पर चले जाएंगे।

मांगों की सूची में शामिल हैं:

– सभी खाली पदों को भरना

– वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 40% मुनाफ़ा शेयरिंग बोनस का भुगतान

– TGGENCO और TGTRANSCO (जो तेलंगाना राज्य सरकार की बिजली उत्पादन और बिजली ट्रांसमिशन कंपनियाँ हैं) से लगभग 56,000 करोड़ रुपये की बकाया राशि वसूलना

– ठेके पर काम करने वाले मज़दूरों के लिए हाई पावर कमिटी के अनुसार वेतन और मेडिकल व शिक्षा सुविधाएँ देना

– सुरक्षा और उत्पादन से जुड़ी ज़रूरी चीज़ों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना

– सिंगरेनी अस्पतालों में सेवनिवृत हो चुके कर्मचारियों का मुफ़्त इलाज

यह बात सभी जानते हैं कि SCCL के लगभग 80,000 रिटायर्ड कर्मचारी भी पिछले कई सालों से सम्मानजनक पेंशन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन चाहे मांगें सेवानिवृत मज़दूरों की हों या स्थायी मज़दूरों की, SCCL मैनेजमेंट हमेशा आर्थिक तंगी का हवाला देकर उनकी मांगें मानने से इनकार कर देता है। लेकिन नीचे दी गई जानकारी से यह साफ पता चलता है कि SCCL की आर्थिक समस्याओं के लिए उसके सेवानिवृत या मौजूदा मज़दूरों बिल्कुल भी जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि SCCL को बकाया राशि का भुगतान न करने की नीति ही उसकी आर्थिक मुश्किलों की एकमात्र वजह है।

SCCL एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, जिसमें तेलंगाना राज्य सरकार की 51% और केंद्र सरकार की 49% हिस्सेदारी है।

यह तेलंगाना की गोदावरी घाटी कोयला खदानों में अंडरग्राउंड (ज़मीन के नीचे) और ओपनकास्ट (खुली) दोनों तरह की खदानें चलाती है। यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी सरकारी कोयला उत्पादक कंपनी है और दक्षिण भारत की एकमात्र बड़ी कोयला खनन कंपनी है। यह भारत के घरेलू कोयले का लगभग 9% उत्पादन करती है। SCCL में अभी लगभग 40,000 स्थायी मज़दूर और लगभग 30,000 ठेका मज़दूर काम करते हैं। 2015-16 में यहाँ लगभग 58,500 स्थायी मज़दूर थे, लेकिन मशीनीकरण और सेवानिवृति के कारण यह संख्या काफी कम हो गई है।

SCCL सरकारी बिजली उत्पादन कंपनियों को भारी मात्रा में कोयले की सप्लाई करती रही है। SCCL 1,200 MW के सिंगरेनी थर्मल पावर प्लांट (STPP) को भी चलाती है और तेलंगाना की बिजली कंपनियों को लंबे समय के ‘पावर परचेज़ एग्रीमेंट’ के तहत बिजली बेचती है। इस तरह, इसने एक सदी से भी ज़्यादा समय से उद्योगों, थर्मल पावर प्लांट, सीमेंट फ़ैक्टरियों को बिजली पहुँचाने और तेलंगाना व दक्षिण भारत के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाई है।

SCCL मैनेजमेंट ने बार-बार यह चिंता जताई है कि राज्य के बिजली क्षेत्र की कंपनियाँ समय पर भुगतान नहीं कर रही हैं, जिससे SCCL के लिए बड़ी आर्थिक समस्याएँ पैदा हो रही हैं। यही मुख्य कारण है कि SCCL आधुनिकीकरण पर तेज़ी से खर्च करने में मुश्किलों का सामना कर रहा है।

सार्वजनिक क्षेत्र में SCCL के कुल बकाया का आंकड़ा ₹29,000 करोड़ से ज़्यादा बताया गया है। इसमें से लगभग ₹19,000 करोड़ का बकाया 2014-2023 के दौरान जमा हुआ, जब भारत राष्ट्र समिति (BRS) की सरकार सत्ता में थी (पहले तेलंगाना राष्ट्र समिति या TRS थी)। वहीं, लगभग ₹10,000 करोड़ का बकाया दिसंबर 2023 के बाद जमा हुआ, जब कांग्रेस सरकार सत्ता में आई। यह बकाया SCCL द्वारा राज्य के थर्मल पावर स्टेशनों को आपूर्ति किए गए कोयले और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड के सिंगरेनी थर्मल पावर प्लांट (1,200 MW) से तेलंगाना की बिजली कंपनियों को आपूर्ति की गई बिजली, दोनों से जुड़ा है। असल बकाया इससे कहीं ज़्यादा हो सकता है, जैसा कि ऊपर बताए गए हड़ताल के नोटिस में यूनियन ने दावा किया है।

एक तरफ़ जहाँ तेलंगाना सरकार SCCL का बकाया नहीं चुका रही है, वहीं उसने अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड, VEM टेक्नोलॉजीज़, वेल्सपन ग्रुप, कार्बन मोबाइल्स, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न, गूगल, इंफोसिस, TCS, नोवार्टिस जैसी कई निजी कंपनियों को हज़ारों करोड़ रुपये की टैक्स छूट, बहुत कम कीमत पर ज़मीन और इंफ्रास्ट्रक्चर में मदद दी है। तेलंगाना सरकार के अपने डैशबोर्ड से पता चलता है कि अप्रैल 2021 से मई 2026 के बीच निवेश-सब्सिडी के लिए 34,691, बिजली खर्च की भरपाई के लिए 5,650 और SGST/VAT की भरपाई के लिए 1,613 आवेदनों को मंज़ूरी दी गई।

इससे एक बार फिर यह बात साफ़ हो जाती है कि सत्ता में मौजूद अलग-अलग पार्टियाँ, चाहे वे केंद्र स्तर पर हों या राज्य स्तर पर, पूँजीपति वर्ग की सेवा करने की पूरी कोशिश करती हैं, जबकि इसका बोझ मेहनतकश लोगों को उठाना पड़ता है।

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